Uttarakhand: उत्तराखंड में सालाना चार धाम यात्रा की तैयारियां जारी हैं। हालांकि ईरान संघर्ष की वजह से दिख रहा एलपीजी संकट व्यापारियों की चिंता बढ़ा रहा है।
चार धाम तीर्थयात्रा राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से एलपीजी आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट से हजारों तीर्थयात्रियों की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
रेस्टोरेंट मालिक सौरभ कांडपाल ने बताया कि “यह क्राइसिस तो ऑल इंडिया लेवल की है, लेकिन हम लोग को ज्यादा दिक्कत हो जाएगी, होटल वालों को, क्योंकि चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है और चार धाम में गैस का कन्जम्पशन थोड़ा बढ़ जाता है। अगर हम लोग को ये नहीं मिल पाएगा तो फिर हम लोग यात्रियों को वो सुविधाएं नहीं दे पाएंगे, जैसा हमेशा होता आया है।”
“पहाड़ी क्षेत्र की बात करूं तो अगर एलपीजी कम आएगी तो इसका जोर पड़ना है, फॉरेस्ट पे। निश्चित तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। मैं चाहता हूं कि जो हिमालयी राज्य हैं, जिनका पर्यावरण से नजदीकी जुड़ाव है, उन्हें इन नीतियों से बचना चाहिए और हमें पहले की भांति गैस मिलनी चाहिए। दूसरा, चार धाम यात्रा सिर पे है। पूरा भारत जो है, उमड़ के उत्तराखंड के चार धाम में आता है। यहां पे उन यात्रियों को, जो बाहर से आए हैं, उनको परेशानी पैदा न हो। लकड़ियों के जलने से गर्मी उत्पन्न होती है। ग्लोबल वार्मिंग जैसी स्थिति ना हो। ग्लेशियर के पिघलने की स्थितियां कम हों। इसलिए उत्तराखंड के खास कर चार धाम यात्रा मार्ग पर खास कर बचा जाना चाहिए।”
कारोबारियों का कहना है कि एलपीजी की किल्लत की वजह से कई लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जो पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं होगा। उत्तराखंड के अधिकारियों का दावा है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। हालांकि, राज्य सरकार ने आने वाले समय के लिए योजना बनाना शुरू कर दिया है ताकि लोगों को दिक्कत न हो। कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए, जलाऊ लकड़ी की आपूर्ति उत्तराखंड वन विकास निगम के माध्यम से की जा सकती है।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि “निश्चित रूप से एक क्राइसिस तो है ही इस समय। जो हमारे तेल पैदा करने वाले देश हैं, सभी जगह इस समय लड़ाई में व्यस्त हैं और कहीं ना कहीं इस समय क्राइसिस तो आएगी आगे, तो इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए पूरी तरह तैयार हों हम लोग और जलाऊ लकड़ी जिस तरह से कमर्शियल जलाई जाती है, उस तरह से व्यवस्था कर रहे हैं। वन विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं कि वो निगम के माध्यम से हम किस तरह कमर्शियल जो हमारे संस्थान हैं, उनको किस तरह लकड़ी सप्लाई कर सकें, इस पर हम लोग व्यवस्था कर रहे हैं।”))
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पर्यटन और तीर्थयात्रा पर आधारित है। ऐसे में राज्य के व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि एलपीजी संकट टल जाएगा और उनकी चिंताएं दूर हो जाएंगी। इस साल चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे।