Mandala art: तबीयत से पत्थर उछालें, तो आसमान में भी छेद हो सकता है, इस कहावत को साबित कर दिखाया है उत्तराखंड में देहरादून की तमन्ना ने। तमन्ना बचपन से ही आंखों से लाचार हैं, लेकिन एक ऐसी कलाकार हैं, जिनकी रचना देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं।
उनका हुनर जटिल और बारीक, फिर भी सटीक है। तमन्ना आठवीं में थीं, जब उन्होंने मंडला कला सीखना शुरू किया। कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया। सिर्फ धैर्य, एकाग्रता और अभ्यास से इस कला में महारत हासिल की।
आज, उनकी लगन ने उनके लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। उनकी कलाकृतियां दिव्या कला मेले में दिखाई जा रही हैं।
तमन्ना की मां को बेटी पर फख्र है। वे बताती हैं कि तमन्ना की छोटी उम्र से ही चित्रकारी में रुचि थी। वे घर पर चित्रकारी करने में तल्लीन रहतीं और बिना गुरु अपनी कला को निखारतीं।
पढ़ाई और कला के बीच संतुलन बनाते हुए, तमन्ना आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। उन्हें ये भी उम्मीद है कि एक दिन वे अपनी कला की कक्षाएं खोलेंगी, ताकि युवा प्रतिभाओं का मार्गदर्शन करें और उनकी प्रतिभा निखार सकें।