CM Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि पूर्व में ड्रॉपआउट की एक प्रमुख वजह स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालयों की कमी थी। राज्य के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अब इसकी समुचित सुविधा होने से ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य हो गई है। यानी अब बहुत कम बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि स्कूल दूर होने की वजह से बेटियां पढ़ने नहीं जा पा रहीं। इसलिए हर गांव में स्कूल खोले गए। लेकिन बाद में पता चला कि सिर्फ स्कूल खोल देना ही काफी नहीं है। कई जगह स्कूलों में जरूरी सुविधाएं नहीं थीं। जब सरकार ने आंकड़ों का अध्ययन किया तो सामने आया कि लड़कियों के लिए अलग शौचालय और साफ पानी की व्यवस्था न होने से वे स्कूल छोड़ देती थीं। इसके बाद सरकार ने हर स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय और पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई।
लखनऊ में आईबीएम एआई गवर्नमेंट टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा, “हम प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग करके हम समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले लोगों के जीवन को बदल सकते हैं।”
आदित्यनाथ ने कहा, “लोग कहते थे कि उनकी बेटियां स्कूल नहीं जा सकतीं क्योंकि स्कूल बहुत दूर है। परिणाम क्या हुआ? हर गांव में स्कूल खोले गए। लेकिन गांवों में स्कूल स्थापित होने के बाद भी, कोई भी अपने बच्चों को भेजने को तैयार नहीं था। हमें इसे बदलने के लिए कड़ी मेहनत और प्रयास करने पड़े।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के सही उपयोग से सरकार समाज के हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीप टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।