Jammu: देश में लैवेंडर की खेती को मजबूत करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन यानि सीएसआईआर ने अरोमा मिशन फेज-III के तहत एक नई पहल की शुरुआत की है। जिसके तहत जम्मू ने देश के पहाड़ी राज्यों में किसानों को छह लाख से अधिक पौधे वितरित किए हैं।
किसान और लैवेंडर विशेषज्ञ तौकीर बागबान ने बताया कि “यह अरोमा मिशन का थर्ड फेज चल रहा है और थर्ड फेज का सीएसआईआर नर्सरी खरीद रहा है किसानों से और फ्री डिस्ट्रीब्यूशन कर रहा है। उन किसानों से जो नए किसान जुड़े हुए हैं आज हमारे साथ। आज उन किसानों को प्लांटिंग मैटेरियल नर्सरी से ले रहे हैं और जो बाकी किसान हैं उनको डिस्ट्रीब्यूट कर रहे हैं।
तो इसमें डिफरेंट्स स्टेट में भी जैसे उत्तराखंड मेघालय हो यहां से प्लांट चला गया उन किसानों के साथ जो नियर बाय हमारे स्टेट हैं हिमाचल हैं तो उसमें भी काफी प्लांट चला गया तो अभी तक पांच से छह लाख प्लांट अभी तक इन किसानों पौधे खरीदकर वितरित किए हैं। इससे काफी फायदा हुआ है।”
जम्मू कश्मीर के डोडा जिले की भदरवाह घाटी में अधिकारियों ने किसानों को मुफ्त पौधे और रोपण सामग्री वितरित की, जो देश में लैवेंडर की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
जम्मू के सीएसआईआर-आईआईएम वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह ने कहा कि “आज हम यहां पर फ्री डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम चलाना चाह रहे हैं। जो कि भदरवाह में हैं।तो अब की बार जो हमारा जो हैं प्लांटिंग मटेरियल नर्सरियों से लगभग छह लाख खरीदा हुआ है। जिसको हमने पूरे भारत में डिस्टीब्यूट करने के लिए भेजा हुआ है यहां से। तो आज की डेट में जो है हमें अपने जो लोकल फार्मर से उनको कवर किया जाएगा। 100 से अधिक स्थानीय किसानों को कवर करेंगे और उन्हें 60 हजार से ज्यादा पौध सामग्री निशुल्क डिस्टीब्यूट करेंगे।))
लैवेंडर एक ऐसा पौधा होता जिसकी देखभाल कम करनी पड़ती है, यह सूखे में भी जीवित रहता है और जानवर भी इसे नहीं खाते। इसलिए पहाड़ी इलाकों में इसे उगाना अच्छा माना जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में शुरू हुआ यह अभियान अब उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और कई उत्तर-पूर्वी राज्यों में फैल चुका है, जिससे भारत की बैंगनी क्रांति को मजबूती मिल रही है।