America: अमेरिका में भारतीय मूल के एक शख्स ने हत्या के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद 43 साल जेल में बिताए, लेकिन बाद में उसका फैसला पलट दिया गया और उसे तुरंत आव्रजन हिरासत में भेज दिया गया, हालांकि अदालत ने उन्हें मंगलवार को जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि वो निर्वासन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।
64 साल के सुब्रमण्यम वेदम 1999 के निर्वासन आदेश के खिलाफ अपील करते हुए हिरासत में ही रहेंगे। आव्रजन अपील बोर्ड ने इस महीने असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए उनकी अपील पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। ट्रंप प्रशासन ने शुरू में त्वरित निर्वासन की कोशिश की थी और पिछले साल शरद ऋतु में वेदम को लुइसियाना के एक हिरासत केंद्र में भेजा था, लेकिन दो अलग-अलग अदालतों ने मामले में दखल दिया।
वेदम के वकील ने तर्क दिया कि अगर हत्या का मामला न होता, तो उस समय के आव्रजन कानूनों के अनुसार उन्हें संभवतः निर्वासन से बचा लिया जाता और उन्हें नागरिकता मिल जाती। वकील एवा बेनाच ने कहा कि वेदम 1992 तक ड्रग्स के आरोप में जेल से बाहर आ चुके होते।
बेनाच ने मंगलवार को कहा, “ये बहुत छोटे पैमाने पर एलएसडी की डिलीवरी थी। ये टन भर कोकीन का आयात नहीं है। वो समाज के लिए खतरा नहीं है। हम उन अपराधों की बात कर रहे हैं, जो 40 साल से भी पहले हुए थे।” अगस्त में पेंसिल्वेनिया के एक न्यायाधीश ने 1980 में एक कॉलेज मित्र की हत्या के मामले में वेदम की दोषी करार दिया था क्योंकि अभियोजकों ने उनके दो मुकदमों के दौरान बैलिस्टिक साक्ष्य का खुलासा नहीं किया था।
बेनाच ने बताया कि जमानत सुनवाई में दूर से शामिल होने वाले समर्थकों में सेंटर काउंटी के एक अभियोजक और स्टेट कॉलेज के मेयर शामिल थे, जहां वेदम के दिवंगत पिता पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर थे। न्यू जर्सी के एलिजाबेथ में बैठी आव्रजन न्यायाधीश टैमर विल्सन ने कहा कि ड्रग्स से संबंधित गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें लगता है कि हिरासत जरूरी है।
दूसरी ओर उन्होंने गृह सुरक्षा विभाग के अधिकारियों से सहमति जताई जिन्होंने कहा कि वो अभी भी सुरक्षा के लिए खतरा है। विल्सन ने कहा, “ये तथ्य कि वो एक ‘आदर्श कैदी’ रहा है, ये नहीं दर्शाता कि आम जनता में वो सुरक्षित रहेगा।” अभी ये स्पष्ट नहीं है कि विल्सन या कोई अन्य न्यायाधीश निर्वासन मामले की सुनवाई करेंगे या नहीं। अभी तक कोई सुनवाई निर्धारित नहीं की गई है।
सुबू की बहन सरस्वती वेदम ने उन्हें उनके पारिवारिक उपनाम से पुकारते हुए कहा, “सुबू मजबूत इरादे वाले हैं और हम उनके द्वारा स्थापित उदाहरण का अनुकरण करते हुए उनकी स्वतंत्रता की लड़ाई में अगला कदम उठाने के लिए दृढ़ हैं। हमें पूरा विश्वास है कि उनका आव्रजन मामला मजबूत है और हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब हम फिर से एक साथ होंगे।”
उन्होंने तीन अक्टूबर को राज्य जेल से रिहा होने पर उन्हें घर लाने की योजना बनाई थी, लेकिन उन्हें संघीय आव्रजन हिरासत में ले लिया गया। वेदम नौ महीने की उम्र में भारत से कानूनी रूप से अमेरिका आए थे, जब उनके माता-पिता स्टेट कॉलेज लौट आए थे।
बेनाच ने पिछले साल एसोसिएटेड प्रेस को बताया था, “उन्होंने घोर अन्याय सहा है। वे 43 साल खाली पन्ना नहीं हैं। उन्होंने जेल में एक असाधारण अनुभव जिया है।” वेदम को मध्य पेंसिल्वेनिया में स्थित 1,800 बिस्तरों वाली अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन सुविधा में रखा गया है। पिछले साल गृह सुरक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने इस मामले के बारे में कहा था, “अमेरिका में आपराधिक अवैध प्रवासियों का स्वागत नहीं है।”