Maha Shivaratri 2026: जानिए इतिहास और धार्मिक मान्यता

Maha Shivratri: महाशिवरात्रि, जिसका अर्थ है “भगवान शिव की महान रात्रि”, हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है। हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि आमतौर पर फरवरी या मार्च महीने में पड़ती है। इस दिन देश-विदेश में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

पौराणिक महत्व
महाशिवरात्रि से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार इसी रात भगवान शिव ने सृष्टि के सृजन, पालन और संहार का प्रतीक माने जाने वाला तांडव नृत्य किया था। वहीं दूसरी कथा के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता Parvati का विवाह हुआ था, जो चेतना और शक्ति के मिलन का प्रतीक है।

शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि इसी पावन रात्रि में भगवान शिव अनंत ज्योति स्तंभ, अर्थात ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, जो उनकी असीम और निराकार सत्ता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और अज्ञान का नाश होता है।

आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अवसर भी है। मान्यता है कि इस रात ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी होती है, जिससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए पूरी रात जागकर “जागरण” करना और ध्यान-भक्ति में लीन रहना विशेष फलदायी माना जाता है।

श्रद्धालु इस दिन कठोर व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर दूध, जल, शहद और बेलपत्र अर्पित करते हैं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है। देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे वाराणसी, उज्जैन और हरिद्वार में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन होते हैं।

सांस्कृतिक उत्सव
भारत के विभिन्न हिस्सों में महाशिवरात्रि अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है। उत्तर भारत में भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन होता है, जबकि दक्षिण भारत में मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। कश्मीर में इसे “हेरथ” के रूप में मनाया जाता है। नेपाल में स्थित प्रसिद्ध Pashupatinath Temple में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।

महाशिवरात्रि का संदेश
महाशिवरात्रि आत्मसंयम, भक्ति और आत्मजागरण का संदेश देती है। भगवान शिव सादगी, वैराग्य और करुणा के प्रतीक हैं। यह पर्व हमें अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता को त्यागकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महाशिवरात्रि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जुड़ाव का अवसर प्रदान करती है। यही कारण है कि यह पर्व सदियों से आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता रहा है और आगे भी लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

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