Dehradun: क्या आपने कभी सोचा था कि हिमालय की ऊंची चोटियों और संकरी घाटियों के बीच रेल की सीटी गूंजेगी? क्या आपने कल्पना की थी कि बदरी-केदार और गंगोत्री-यमुनोत्री के दुर्गम सफर को आप ट्रेन की खिड़की से निहारते हुए पूरा करेंगे? जी हां, यह सपना अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। केंद्र सरकार ने संसद में चारधाम रेल परियोजना को लेकर वो आंकड़े रखे हैं, जो बताते हैं कि उत्तराखंड की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाली है। 40 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का बजट, सैकड़ों किलोमीटर लंबी सुरंगें और पांच जिलों की सीधी कनेक्टिविटी।
“उत्तराखंड के लिए बुधवार का दिन संसद से बड़ी खुशखबरी लेकर आया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कर दिया कि चारधाम को रेल सेवा से जोड़ने का काम अब अंतिम दौर की ओर है। 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन न केवल पहाड़ों की दूरी कम करेगी, बल्कि पर्यटन का नया अध्याय लिखेगी। सरकार ने बताया कि 216 किलोमीटर की तीन नई रेल लाइनों को मंजूरी मिल चुकी है, जिसकी कुल लागत 40 हजार 384 करोड़ रुपये आंकी गई है। राहत की बात यह है कि मार्च 2025 तक करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं, जो इस प्रोजेक्ट की रफ्तार को बयां करता है।”
“यह सफर जितना रोमांचक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। यह रेल लाइन पांच प्रमुख जिलों देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली को एक सूत्र में पिरोएगी। क्योंकि पहाड़ का भूगोल कठिन है, इसलिए इस परियोजना का अधिकांश हिस्सा पाताल की गहराई यानी सुरंगों से होकर गुजरेगा। सरकार के मुताबिक, 104 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य सुरंगों में से 99 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। सुरक्षा के लिए बनाई जा रही एस्केप सुरंगें भी लगभग तैयार हैं। यानी जल्द ही ट्रेन टनल से होते हुए देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंचेगी।”
“संसद के भीतर जब उत्तराखंड के विकास का खाका खींचा गया, तो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन को दोहराया, जो पहाड़ों की दुर्गम दूरियों को खत्म करने के लिए संकल्पित है। इस महापरियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने सदन में जो कहा, वो उत्तराखंड के हर निवासी के लिए उम्मीद की एक नई किरण है…”
बाइट -रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
“चारधाम रेल परियोजना सिर्फ पटरी बिछाने का काम नहीं है, बल्कि यह पहाड़ से पलायन रोकने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का एक बड़ा जरिया है। जब ऋषिकेश से सीधे कर्णप्रयाग तक ट्रेन दौड़ेगी, तो समय की बचत के साथ-साथ तीर्थयात्रा भी सुगम और सस्ती होगी। पर्यटन और आर्थिकी के इस संगम से देवभूमि का कोना-कोना चमक उठेगा। अब वह दिन दूर नहीं, जब ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ पहाड़ के ही काम आएगी, और इसमें सबसे बड़ा योगदान होगा—इस चारधाम रेल सेवा का।