OM Birla: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने पर विपक्ष विचार कर रहा है, बिरला पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राहुल गांधी सहित दूसरे विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने से रोकने और आठ सांसदों को निलंबित करने का आरोप है।
इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कुछ दूसरे नेताओं ने बिरला से मुलाकात कर गतिरोध को खत्म करने की कोशिश की। पिछले हफ्ते पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को भारत-चीन मुद्दे पर बोलने की इजाजत न दिए जाने के बाद से सदन सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है।
सूत्रों के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत प्रस्ताव के लिए नोटिस जारी किए जाने की संभावना है और 100 से अधिक विपक्षी सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। हालांकि, टीएमसी एसआईआर मुद्दे को और अधिक मुखरता से उठाना चाहती है जबकि समाजवादी पार्टी मालवा की रानी अहिल्याबाई होलकर के कथित अपमान को उजागर करना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता को बोलने से रोकने, कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ निराधार आरोप लगाने वाले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई शुरू न करने और आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के लिए अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में लोकसभा में जल्द ही एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा और सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 103 सांसदों ने पहले ही प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और स्पीकर के खिलाफ नोटिस जारी करने का अंतिम फैसला मंगलवार को लिया जाएगा।
सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद राहुल गांधी, टीएमसी के अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और डीएमके के टीआर बालू ने बिरला से मुलाकात की ताकि गतिरोध को खत्म किया जा सके। नेताओं ने बातचीत के दौरान सदन में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के अलग-अलग कारणों पर चर्चा की। गांधी ने स्पीकर से ये भी कहा कि यदि उन्हें बोलने की इजाजत दी जाए तो वे चर्चा के लिए तैयार हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता अब स्पीकर ओम बिरला के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान स्पीकर ने विपक्षी नेताओं से कहा कि वे सरकार से बात करने के बाद उन्हें जवाब देंगे, कुछ मिनटों तक चली इस बैठक में गांधी और अन्य नेताओं ने स्पीकर को सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों से अवगत कराया।
सूत्रों ने बताया कि गांधी ने स्पीकर को बताया कि वे आठ कांग्रेस सांसदों के निलंबन और संसद से जुड़े अन्य मामलों, जिनमें महिला सांसदों पर लगे आरोप भी शामिल हैं, उनको उठाना चाहते हैं। उन्होंने स्पीकर से आठ सांसदों का निलंबन रद्द करने की भी अपील की ताकि गतिरोध खत्म हो सके। दो फरवरी को गांधी को बोलने की इजाजत न दिए जाने के बाद से लोकसभा ठीक से नहीं चल रही है। राज्यसभा ने सोमवार को 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा शुरू की।
लोकसभा अध्यक्ष के साथ बैठक के बाद गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए संसद के निचले सदन में नहीं आए क्योंकि वे पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से “डरे हुए” थे, विपक्ष के नेता ने उन लोगों को चुनौती दी जिन्होंने पिछले गुरुवार को सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री को धमकी दिए जाने का दावा किया था कि वे मोदी को धमकी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ “एफआईआर दर्ज कराएं”।
गांधी ने कहा कि विपक्ष इस चर्चा को लेकर बेहद उत्सुक है। उन्होंने दावा किया कि भारत-अमेरिका समझौते, उसके तरीके और किसानों पर उसके प्रभाव के कारण सरकार बजट पर चर्चा करने से डर रही है। उन्होंने कहा, “हम इस बात से बेहद परेशान हैं कि सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री को धमकी देने की बात फैलाई जा रही है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। सच्चाई बिल्कुल स्पष्ट है प्रधानमंत्री सदन में आने से डर रहे थे, सांसदों की वजह से नहीं बल्कि मेरी बातों की वजह से और वे अब भी डरे हुए हैं क्योंकि वे सच्चाई का सामना नहीं कर सकते।”
गांधी ने सवाल किया।, “उन्हें (मोदी को) आने का साहस दिखाना चाहिए। मैंने यह भी कहा था कि ‘देखिए, अगर किसी ने कहा है कि वो प्रधानमंत्री पर हमला करने जा रहा है, तो कृपया एफआईआर दर्ज करें, उस व्यक्ति को गिरफ्तार करें।’ आप ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?
उन्होंने कहा, “समझौता ये है कि हमें ये मुद्दे उठाने की अनुमति दी जाएगी और फिर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन देखते हैं सरकार क्या कहती है। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि सरकार बहस करने से डर रही है। प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए। वे हमारी बातों से डरे हुए थे, वे नरवणे की किताब को पहले कदम के रूप में सौंपे जाने से डरे हुए थे।”
इसके अलावा महिला कांग्रेस सांसदों ने बिरला को उनके द्वारा लगाए गए “बेबुनियाद आरोपों” के संबंध में पत्र लिखा है, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई महिला सांसदों ने पत्र में अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई है। आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी नेताओं की बैठक में बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में टीएमसी, वामपंथी दल, डीएमके, सपा, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और आरएसपी सहित कई दलों ने भाग लिया। यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है तो ये लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ चौथा और मौजूदा स्पीकर बिरला के खिलाफ पहला नोटिस होगा। पहला प्रस्ताव प्रथम अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर के विरुद्ध लाया गया, जो पराजित हुआ। फिर अध्यक्ष हुकुम सिंह के विरुद्ध एक प्रस्ताव लाया गया, जिसे सदन में बहुमत की कमी के कारण नहीं उठाया जा सका। तीसरा प्रस्ताव अध्यक्ष बलराम जाखड़ के विरुद्ध लाया गया, जो भी पराजित हुआ।