West Bengal: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चुनावी प्रशासन से संबंधित कई आदेशों के कथित अनुपालन में कमी का मुद्दा उठाया और नौ फरवरी तक समयबद्ध अनुपालन की मांग की। ये जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।
मुख्य सचिव को लिखे पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद पहले जारी किए गए कई आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया है। चुनाव आयोग ने बताया कि दो मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ), दो सहायक ईआरओ और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
चुनाव आयोग ने इस संबंध में पांच अगस्त, 2025 और दो जनवरी, 2026 के अपने पत्रों का हवाला दिया। इसमें सुमित्रा प्रतीम प्रधान, एईआरओ और बशीरहाट-II की ब्लॉक विकास अधिकारी को निलंबित करने में विफलता को भी उजागर किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन में स्वतः संज्ञान लेते हुए आदेश जारी करके 11 अतिरिक्त एईआरओ को अनाधिकृत रूप से तैनात किया था।
आयोग ने 25 जनवरी, 2026 के पत्र के माध्यम से 48 घंटों के भीतर अनुपालन की मांग की थी और कहा कि ये मामला 21 सितंबर, 2000 के उच्चतम न्यायालय के आदेश और 31 मई, 2023 के चुनाव आयोग के आदेशों का उल्लंघन है। आयोग ने आगे कहा कि तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों, अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे के तबादलों को 27 अक्टूबर, 2025 को जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संबंधी आदेशों का उल्लंघन होने के बावजूद रद्द नहीं किया गया है।
इसने 27 जनवरी, 2026 के अपने पत्र का हवाला दिया, जिसमें 28 जनवरी को दोपहर तीन बजे तक अनुपालन की मांग की गई थी। चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण अधिकारियों और प्रतिवेदन अधिकारियों के रूप में अधिकारियों की नियुक्ति पर भी चिंता व्यक्त की, जो उसके निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं है।
आयोग ने कहा कि 16 जून, 2023 और 26 जून, 2023 के निर्देशों के अनुसार एसडीओ/एसडीएम स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी थी और 19 जनवरी, 2026 के उच्चतम न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का हवाला दिया। आयोग ने इन मामलों पर अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच जारी किए गए कई पत्रों का हवाला दिया और राज्य सरकार से नौ फरवरी को दोपहर तीन बजे तक सभी लंबित मुद्दों पर अनुपालन पेश करने को कहा।