America: मैंने ईरान के मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के साथ फोन पर चर्चा की- डोनाल्ड ट्रंप

America: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के साथ फोन पर चर्चा की, ईरान को अलग-थलग करने के लिए चीन और अन्य देशों पर दबाव बनाने के अमेरिकी प्रशासन के प्रयासों के बीच दोनों नेताओं ने बातचीत की है।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी चिनपिंग से व्यापार और ताइवान समेत अमेरिका-चीन संबंधों से जुड़े मुद्दों और अप्रैल में चीन यात्रा की अपनी योजना पर भी बात की। उन्होंने फोन पर हुई बातचीत के बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “चीन और राष्ट्रपति शी के साथ मेरे व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे हैं और हम दोनों को पता है कि संबंध को जस का तस रखना कितना महत्वपूर्ण है।”

चीन सरकार ने बातचीत के बारे में जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि दोनों नेताओं ने आगामी वर्ष में दोनों देशों की अलग-अलग मेजबानी में होने वाले प्रमुख सम्मेलनों और अपनी मुलाकात के संभावित अवसरों पर चर्चा की। हालांकि चीन सरकार ने अप्रैल में ट्रंप की संभावित चीन यात्रा का कोई उल्लेख नहीं किया। चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन की मुख्यभूमि से ताइवान के विलय की लंबे समय से जारी योजना से पीछे हटने का उसका कोई इरादा नहीं है। चीन का दावा है कि ताइवान उसका हिस्सा है।

चीनी बयान में कहा गया है, “चीन ताइवान को कभी अलग नहीं होने देगा।” ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने पर लगातार जोर दे रहे ट्रंप ने पिछले महीने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि वह ईरान से कारोबार करने वाले देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत तक कर लगाएंगे।

परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए ईरान पर वर्षों से लागू पाबंदियों के कारण देश अलग-थलग पड़ गया है। हालांकि विश्व व्यापार संगठन के अनुसार 2024 में ईरान ने 125 अरब अमेरिकी डॉलर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया, जिसमें से 32 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार चीन से हुआ। इसके अलावा 28 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार संयुक्त अरब अमीरात और 17 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार तुर्किये के साथ किया गया। इसके अलावा चिनफिंग ने बुधवार को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बात की।

शी की पुतिन और ट्रंप से बातचीत ऐसे समय में हुई है जब रूस और अमेरिका के बीच ‘न्यू स्टार्ट’ के नाम से जानी जाने वाली अंतिम शेष परमाणु संधि गुरुवार को समाप्त होने वाली है। इस संधि के समाप्त होने से पहली बार, 50 साल से अधिक समय में, दोनों देशों के परमाणु शस्त्रागारों पर कोई सीमा नहीं रहेगी। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह परमाणु हथियारों पर सीमा बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन वह किसी संभावित नई संधि में चीन को भी शामिल करना चाहते हैं।

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