Syria: एक दुर्लभ और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए, सीरिया की सेना देश के उत्तर-पूर्व में स्थित कुर्द गढ़ ‘हसाकेह’ में दाखिल हो गई है। सालों बाद ऐसा हुआ है जब वहां सरकारी बलों की तैनाती हुई है। हफ्तों चली लड़ाई और युद्ध के मैदान में बदलते समीकरणों के बाद, सीरियाई सरकार और कुर्द अगुवाई वाली ‘सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस’ के बीच समझौते के बाद ये कदम उठाया गया है।
सवाल है कि आखिर बदला क्या है?
दरअसल इस साल के शुरू में सरकारी सेना के आगे बढ़ने से एसडीएफ को अपने कई इलाकों से हाथ धोना पड़ा था। इसके चलते 2025 में ठंडे बस्ते में जा चुका समझौता फिर से बहाल हो गया। समझौते के तहत, सीरियाई सुरक्षा बल अब पासपोर्ट कार्यालयों, नागरिक रजिस्ट्री और हवाई अड्डों समेत प्रमुख सरकारी संस्थानों की सुरक्षा संभालेंगे। ये बदलाव हसाकेह और कामिशली जैसे उन इलाकों में लागू होगा, जहां अब तक सरकारी सेना के प्रवेश पर रोक थी।
इस बदलाव के बाद एसडीएफ लड़ाके इन जगहों से पीछे हट जाएंगे। स्थानीय कुर्द पुलिस रोजमर्रा की सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। सुरक्षा जांच के बाद एसडीएफ की चुनिंदा यूनिट्स को सीरियाई सेना में शामिल किया जाएगा।
समझौते का मकसद कुर्द अधिकारों की सुरक्षा और विस्थापित परिवारों की घर वापसी भी है। ये धीरे-धीरे सीरिया के सरकारी नियंत्रण की वापसी का संकेत है। वहीं, कुर्दों के लिए ये ‘नपा-तुला जोखिम’ है, जिसके तहत उन्होंने सुरक्षा गारंटी के बदले अपना कब्जा छोड़ा है। फिलहाल देखना है कि क्या ये समझौता सीरिया में स्थायी एकीकरण लाएगा या सिर्फ अस्थायी शांति है? यही सीरियाई युद्ध के बाद का भविष्य तय करेगा।