Maharashtra: पुणे पोर्श हादसा मामले में तीन आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ का था आरोप

Maharashtra: सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को साल 2024 के पुणे पोर्श हादसे के तीन आरोपियों को जमानत दे दी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने ये भी कहा कि नाबालिगों से जुड़ी ऐसी घटनाओं के लिए माता-पिता ही जिम्मेदार हैं। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को संभालने में असमर्थ हैं।

कोर्ट ने कहा, “नशा करना एक बात है, लेकिन उन्हें (बच्चों को) कार की चाबी देना और मौज-मस्ती के लिए पैसे देना अस्वीकार्य है।” 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ द्वारा दायर जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।

गायकवाड़ पर आरोप है कि वो एक बिचौलिए के रूप में काम कर रहे थे, जिन्होंने अस्पताल में एक डॉक्टर के सहायक को नाबालिग आरोपी के रक्त के नमूने को बदलने के लिए तीन लाख रुपये दिए थे। 19 मई, 2024 को, पुणे के कल्याणी नगर इलाके में शराब के नशे में धुत 17 साल के लड़के द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। सात जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और सिद्धार्थ अग्रवाल द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि दुर्घटना के समय 17 वर्षीय मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद दो नाबालिगों की जांच के लिए उनके रक्त के नमूनों का इस्तेमाल किया गया था।

पिछले साल 16 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने इस मामले में गायकवाड़, सूद और मित्तल सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने नाबालिग आरोपी को नरम शर्तों पर जमानत दे दी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। जमानत की शर्तों में सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना शामिल था।

नाबालिग को जमानत दिए जाने पर मचे बवाल के बाद पुणे पुलिस ने जेजेबी से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। बोर्ड ने आदेश में संशोधन किया और नाबालिग को एक निगरानी गृह में भेज दिया। जून में उच्च न्यायालय ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया।

इस मामले में शामिल नाबालिग को निगरानी गृह से रिहा कर दिया गया, जबकि उसके माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरि हलनोर, ससून अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकांबले, आदित्य अविनाश सूद, आशीष मित्तल और अरुण कुमार सिंह और दो बिचौलियों सहित 10 आरोपियों को रक्त के नमूने बदलने के मामले में जेल भेज दिया गया।

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