Budget 2026: बजट में वित्त मंत्री ने देश में 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की

Budget 2026:  बजट में वित्त मंत्री ने देश में 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है. इसमें मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, वाराणसी और सिलीगुड़ी शामिल हैं.

देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनेंगे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की. वित्त मंत्री का कहना है कि इससे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी. बजट में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से देश के कई शहरों को जोड़ा लाएगा. इसका मकसद देश के प्रमुख महानगरों को औद्योगिक और धार्मिक शहरों से जोड़ता है

इसमें मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, वाराणसी और सिलीगुड़ी शामिल हैं.वित्त मंत्री का कहना है कि इस कॉरिडोर के जरिए फाइनेंशियल सेंटर, आईटी सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को जोड़ा जाएगा

1- मुंबई: देश की फाइनेंशियल कैपिटल

मुंबई को देश की फाइनेंशियल कैपिटल कहते हैं और यह महानगर भी है. RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक), SEBI, BSE और NSE यहीं हैं. शेयर बाजार, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस, सीधे मुंबई से जुड़े हैं. लगभग सभी बड़े भारतीय बैंक और प्राइवेट बैंक के हेडक्वार्टर/मुख्य ऑफिस मुंबई में हैं. वहीं, रिलायंस, टाटा, अडानी, L&T जैसी दिग्गज कंपनियों का बड़े ऑपरेशंस यहीं से चलते हैं. पोर्ट और ट्रेड गेटवे के मामले में भी मुंबई की भूमिका खास है. इसके साथ ही बॉलीवुड, टीवी, OTT और विज्ञापन इंडस्ट्री अरबों रुपये का कारोबार करती है और सरकार टैक्स रेवेन्यू के साथ आम लोगों को नौकरियां देता है. देश का सबसे महंगा और एक्टिव रियल एस्टेट मार्केट यहीं हैं. इसे सरकार ने हाई स्पीड रेल कॉरिडोर है.

2- पुणे: ऑटो, इंजीनियरिंग और MSME सेक्टर का हब

मुंबई के बाद पुणे को महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक इंजन कहा जाता है. सरकार ने अपने बजट में मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस किया है. पुणे इसके लिए भी जाना जाता है. यहां टाटा मोटर्स, बजाज ऑटो, महिंद्रा, मर्सिडीज-बेंज, फोर्स मोटर्स जैसी कंपनियां काम कर रही हैं. ऑटो, इंजीनियरिंग और MSME सेक्टर से लाखों नौकरियां मिलती हैं. हिंजवड़ी IT पार्क, मगरपट्टा, खड़की-तलेगांव बेल्ट बड़े IT क्लस्टर हैं. यहां AI, फिनटेक और डीप-टेक स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं. यहां ऑटो-कंपोनेंट्स, मशीन टूल्स, फार्मा, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के सेंटर भी हैं. शिक्षा के मामले में इसे पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहा जाता है. यहां स्किल इकोनॉमी बढ़ाने वाले COEP, Symbiosis, Savitribai Phule Pune University जैसे संस्थान हैं.

3- हैदराबाद: ड्रग कैपिटल ऑफ इंडिया

यह IT और ग्लोबल टेक हब कहा जाता है. यहां माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन, मेटा, ऐपल, इंफोसिस, टीसीएस और एक्सेंचर जैसी कंपनियां हैं. हैदराबाद को ड्रग कैपिटल ऑफ इंडिया कहते हैं. यहां तैयार होने वाली दवाओं और वैक्सीन के एक्सपोर्ट से अरबों की कमाई होती है. यह शहर फार्मा पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सेंटर भी है. स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम की बात करें तो यहां T-Hub, WE-Hub जैसे इनक्यूबेशन सेंटर हैं. हैदराबाद अकेले ही तेलंगाना के GSDP का बड़ा हिस्सा पैदा करता है

6- दिल्ली: पूरे देश का रुख तय करती है राष्ट्रीय राजधानी

मुंबई बेशक पैसा मैनेज करती है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली नियम बनाने के साथ बाजार चलाती है. यही वजह है कि दिल्ली देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है. देश की राजधानी होने के कारण सभी बड़े मंत्रालय, नियामक और नीति-निर्माण यहीं से होता है. यहां लिए जाने वाले फैसलों का सीधा असर निवेश, उद्योग और बाजारों पर पड़ता है. यह कंसल्टिंग, लीगल, मीडिया, एजुकेशन, हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर का हब है. यह एक्सप्रेसवे, रेल नेटवर्क और एयर कार्गो का बड़ा केंद्र है. यह इंटरनेशनल कनेक्टिविटी के लिए भी जाना जाता है.GDP और टैक्स रेवेन्यू में बड़ा योगदान

7- वाराणसी: देश की धार्मिक राजधानी

वारणसी को देश की धार्मिक राजधानी और दुनिया के सबसे प्राचीर शहरों में से एक माना जाता है. यह काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा आरती, 84 घाटों के साथ हिंदू आस्था का केंद्र. हर साल यहां करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं और धार्मिक पर्यटन से होने वाली कमाई आर्थिक दायरे को मजबूत करती है. यह बौद्ध सर्किट (सारनाथ) का अहम हिस्सा है. सरकार ने इस साल भी बौद्ध सर्किट पर ऐलान किए हैं. BHU (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) देश के शीर्ष संस्थानों में से एक है. मौर्य काल से आधुनिक भारत तक वाराणसी की ऐतिहासिक भूमिका रही है.

8- सिलीगुड़ी: नॉर्थ-ईस्ट का लॉजिस्टिक गेटवे

भारत का सबसे संवेदनशील रणनीतिक कॉरिडोर यही हैं. सिलीगुड़ी से पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्य जुड़ते हैं. पूर्वोत्तर राज्यों की सप्लाई-चेन सिलीगुड़ी पर निर्भर है. यही वजह है कि इसे नॉर्थ-ईस्ट का लॉजिस्टिक गेटवे कहते हैं. यह दार्जिलिंग टी और उत्तर बंगाल की कृषि उपज का बड़ा ट्रेड सेंटर कहा जाता है. नॉर्थ बंगाल का सबसे बड़ा शहरी और कमर्शियल हब यही है

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