R-Day parade: गणतंत्र दिवस परेड में केंद्रीय गृह मंत्रालय की झांकी में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू किए जाने को प्रदर्शित किया गया, जो 2024 में भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक काल के कानूनों से आधुनिक, नागरिक-केंद्रित ढांचे की ओर ले जाने वाले परिवर्तन का प्रतीक है।
झांकी के अगले भाग में तीनों नए कानूनों की पुस्तकों को नए संसद भवन के ऊपर रखा गया था, जो कानून-निर्माण की संप्रभु शक्ति और प्रगतिशील सुधारों का प्रतीक था। इसके पीछे भारत का संविधान पृष्ठभूमि के रूप में दर्शाया गया, जो यह संदेश देता है कि संविधान के मूल्य और लोकतांत्रिक सिद्धांत ही सुधारित न्याय व्यवस्था की आधारशिला बने हुए हैं।
झांकी के मध्य भाग में नए कानूनों की प्रगतिशील विशेषताओं को दर्शाया गया। इसमें एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ को आधुनिक उपकरणों के माध्यम से अपराध स्थल की जांच कर साक्ष्य एकत्र करते हुए दिखाया गया, वहीं एक पुलिस अधिकारी टैबलेट के जरिए ‘ई-साक्ष्य’ मोबाइल ऐप पर साक्ष्य दर्ज करता नजर आया।
‘फिंगरप्रिंट’ छाप पर केंद्रित एक आवर्धक कांच वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित जांच पर दिए जा रहे विशेष जोर का प्रतीक था। पूरी झांकी में दर्शाए गए नारों के माध्यम से इन तीनों कानूनों की जन-केंद्रित भावना को व्यक्त किया गया, जो एक जुलाई 2024 से लागू हुए और औपनिवेशिक कालीन भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया।
एक मोबाइल फॉरेंसिक वैन और आधुनिक नियंत्रण कक्ष से आपातकालीन हेल्पलाइन 112 संचालित करती एक महिला पुलिस कांस्टेबल ने त्वरित पुलिसिंग, प्रौद्योगिकी-आधारित सेवाओं और लैंगिक समावेशी कानून प्रवर्तन को दर्शाया। झांकी का पिछला हिस्सा ‘जन-केंद्रित न्याय प्रणाली’ के मूल दर्शन को प्रदर्शित कर रहा था। ऐसी न्याय प्रणाली जो सुलभ, जवाबदेह और समावेशी हो।
झांकी के साथ-साथ चलते हुए पुलिसकर्मी, एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ और एक पुलिस कमांडो तत्परता, पेशेवर दक्षता और जन-विश्वास के प्रतीक थे। यह झांकी समकालीन जरूरतों और संवैधानिक आदर्शों के अनुरूप पारदर्शी, प्रभावी और जनता-उन्मुख आपराधिक न्याय प्रणाली की ओर भारत में आए बदलाव को दर्शाती है।