Republic Day: गणतंत्र दिवस के मौके पर सोमवार को कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान केरल की झांकी ने राज्य की दो महत्वपूर्ण उपलब्धियों को दिखाया। ये झांकी भारत की पहली वाटर मेट्रो और 100 फीसदी डिजिटल होने की उपलब्धि पर आधारित थी।
ये दोनों उपलब्धियां आत्मनिर्भर केरल की दिशा में समावेशी विकास का एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत करती हैं, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देती हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी इस झांकी में एक महिला को डिजिटल साक्षरता की ब्रांड एंबेसडर के रूप में दर्शाया गया था, जो जमीनी स्तर पर डिजिटल सशक्तिकरण का प्रतीक है।
इसमें सोशल मीडिया के माध्यम से पारंपरिक पाक कला का प्रदर्शन किया गया है, जिसमें दिखाया गया कि कैसे डिजिटल पहुंच आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और व्यापक पहुंच को सक्षम बनाती है। केरल के प्रतिष्ठित मसाले और कृषि उत्पाद – नारियल, कटहल, केला, काली मिर्च और अदरक दिखाए गए, जो डिजिटल कनेक्टिविटी द्वारा मजबूत समृद्ध ग्रामीण जीवन का प्रतीक थे।
झांकी में टर्मिनल सहित एक पूर्ण आकार की वाटर मेट्रो नाव दिखाई गई, जो हरित और समावेशी गतिशीलता का प्रतिनिधित्व करती है। कोच्चि के बैकवाटर के द्वीपों को जोड़ने के लिए डिज़ाइन की गई वाटर मेट्रो ने सभी के लिए सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ परिवहन सुनिश्चित किया है।
इस झांकी में जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों को दर्शाया गया था, जिनमें हरित कर्म सेना के सदस्य भी शामिल थे, जो राज्य की अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित “हरित सेना” है।
झांकी के दोनों ओर लोक नर्तकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए केरल की समृद्ध विरासत को पेश किया। परंपरा और नवाचार का मिश्रण करते हुए, झांकी ने डिजिटल समावेशन, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत परिवहन को एक साथ प्रस्तुत किया।
झांकी ने दर्शाया कि कैसे प्रौद्योगिकी और हरित परिवहन आत्मनिर्भर केरल के लिए समृद्धि मंत्र बन गए हैं, जो गांवों, द्वीपों और शहरों में समुदायों को मजबूत कर रहे हैं और आत्मनिर्भर भारत में योगदान दे रहे हैं।