Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले में ‘दो पुरी शंकराचार्यों’ की उपस्थिति पर उठाए सवाल

Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, माघ मेला प्रशासन द्वारा ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का उपयोग करने पर प्रशासन ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मेला प्रशासन से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूछा है कि पुरी के एक अन्य शंकराचार्य की उपस्थिति का दावा करने वाले बोर्ड पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी।

उन्होंने कहा, “आप पूछते हैं कि जो शंकराचार्य नहीं है, वह इस उपाधि का उपयोग क्यों कर रहा है? पुरी के शंकराचार्य यहां मौजूद हैं और उनका शिविर लगा हुआ है। उनके शिविर के पास ही पुरी के एक अन्य शंकराचार्य, अधोक्षजानंद देव तीर्थ महाराज, गोवर्धन पीठ शंकराचार्य का बोर्ड भी लगा है। पुरी के दो शंकराचार्य कैसे हो सकते हैं?”

रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर सरस्वती अपने समर्थकों के साथ संगम में स्नान करने जा रहे थे, तभी पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया, जिसके बाद हंगामा मच गया। इस घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर हैं।

भेदभाव का आरोप लगाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मेला प्रशासन ने एक अन्य शंकराचार्य के शिविर को पुरी के “वास्तविक” शंकराचार्य को परेशान करने की अनुमति दी थी। सरस्वती ने कहा कि गौ संरक्षण से संबंधित मांगें उठाने के कारण उन्हें चुनिंदा रूप से नोटिस जारी किए गए।

उन्होंने कहा कि नोटिस का जवाब ईमेल के माध्यम से भेजा जाएगा और वे मेला प्रशासन को भी नोटिस भेजेंगे, जिसमें वे यह सवाल उठाएंगे कि प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के अपूर्ण आदेशों का हवाला क्यों दे रहा है। सरस्वती ने आगे तर्क दिया कि चूंकि ज्योतिष पीठ का मामला अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए मेला प्रशासन को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं।

पूर्व मुकदमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ज्योतिष पीठ से संबंधित एक मामले की पहली सुनवाई 1999 में इलाहाबाद जिला न्यायालय में हुई थी, जिसने फैसला सुनाया था कि स्वामी वासुदेवानंद को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *