Anup Jalota: सिंगर अनूप जलोटा के दुनिया के जाने-माने म्यूज़िक कंपोज़र ए.आर. रहमान की हालिया टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देने के बाद बॉलीवुड में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे ने एक बार फिर धर्म, फिल्मों और कलात्मक स्वतंत्रता के बारे में सार्वजनिक बहस छेड़ दी है।
ए.आर. रहमान ने क्या कहा?
हाल ही में, ए.आर. रहमान ने इस बारे में बात की कि उन्हें कैसे लगता है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि पहले के मुकाबले उन्हें बॉलीवुड में कम काम मिल रहा है। इंटरव्यू के दौरान रहमान ने इस बदलाव में धर्म के एक कारण होने की संभावना का इशारा किया। उन्होंने आने वाले ऐतिहासिक ड्रामा ‘छावा’ को ‘बांटने वाला’ बताया, जिससे समाज के अलग-अलग ग्रुप्स से कड़ी प्रतिक्रियाएं आईं। रहमान की बातें सोशल मीडिया पर तेज़ी से पॉपुलर हो गईं। जहां कुछ लोगों ने उनकी बेबाकी की तारीफ की और उनका साथ दिया, वहीं दूसरों को लगा कि उनकी बातें फालतू थीं और गलतफहमी पैदा कर सकती हैं।
अनूप जलोटा का रिएक्शन:
अनुप जलोटा, जो एक अनुभवी सिंगर हैं, रहमान की राय से सहमत नहीं थे। एक वीडियो बयान में, जलोटा ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में धर्म से ज़्यादा टैलेंट ज़रूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर रहमान को लगता है कि उनके धर्म की वजह से उनकी नौकरी गई है, तो उन्हें “फिर से हिंदू बन जाना चाहिए” और देखना चाहिए कि क्या उनकी हालत सुधरती है। कई लोगों को जलोटा का बयान आपत्तिजनक और विवादित लगा। कुछ लोगों ने रचनात्मकता और संगीत पर ज़ोर देने के बजाय मामले में धर्म को लाने के लिए उनकी आलोचना की।
रहमान का स्पष्टीकरण:
विवाद के बाद ए.आर. रहमान ने साफ किया कि उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी भारत की विविधता और सांस्कृतिक सद्भाव पर विश्वास है और उनका मकसद सिर्फ अपना अनुभव शेयर करना था। चल रही ऑनलाइन बहस दिखाती है कि जाने-माने लोगों की बातें कितनी आसानी से राष्ट्रीय बहस छेड़ सकती हैं।