Union Budget 2026: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के व्यापारी हर दिन सुबह नई उम्मीद के साथ अपनी दुकानें खोलते हैं। लेकिन दिन खत्म होते-होते उनकी हर आस टूट जाती है। उनका दिन बिना किसी राहत के खत्म हो जाता है। दुकानों के इन काउंटरों के पीछे बैठे व्यापारी सिर्फ ग्राहकों का इंतजार नहीं कर रहे हैं।उनका मुकाबला ई-कॉमर्स पोर्टलों से भी है। छोटे व्यापारियों के लिए डर सिर्फ होड़ लगाने का नहीं, बल्कि अस्तित्व का है।
शिमला के व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ऑनलाइन खरीदारी की तेज बढ़ोतरी ने पारंपरिक व्यवसायों को हाशिए पर धकेल दिया है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि दवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी ने उनकी बिक्री को काफी कम कर दिया है। उनके मुताबिक अब सिर्फ अस्पतालों के पास की दवा की दुकानों पर ही खरीदारों की भीड़ दिखती है।
छोटे-मोटे दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग ने उन्हें बुरी तरह प्रभावित किया है। उनके मुताबिक जब तक सरकार ई-कॉमर्स पोर्टलों को विनियमित नहीं करती, तब तक उनका अस्तित्व खतरे में है। आभूषण विक्रेताओं ने भी आगामी केंद्रीय बजट पर अपनी उम्मीदें टिका रखी हैं। वे सीमा शुल्क में राहत देने की मांग कर रहे हैं ताकि शादियों के सीजन में उनकी बिक्री बढ़ सके।
केंद्रीय बजट से पहले जैसे-जैसे उम्मीदें बढ़ रही हैं, शिमला के व्यापारी सरकार से महंगाई पर लगाम लगाने की अपील कर रहे हैं। साथ ही वे चाहते हैं कि ऑनलाइन व्यापार को विनियमित किया जाए और छोटे व्यवसायों को बचाया जाए, इससे पहले कि कई और दुकानें हमेशा के लिए बंद हो जाएं।