Nobel Prize: डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर अपने रुख को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से जोड़ रहे- यूरोपीय संघ

Nobel Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपने आक्रामक रुख को पिछले साल उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न दिए जाने के फैसले से जोड़ा है। सोमवार को जारी एक टेक्स्ट संदेश में उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री से कहा कि अब उन्हें “केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती”।

ट्रंप का जोनास गहर स्टोर को भेजा गया ये संदेश ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी धमकियों को लेकर वाशिंगटन और उसके सबसे करीबी सहयोगियों के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है। ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र है। शनिवार को ट्रंप ने घोषणा की कि फरवरी से डेनमार्क और ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले आठ देशों, जिनमें नॉर्वे भी शामिल है, वहां से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाएगा।

इन देशों ने इसका कड़ा विरोध किया है, अमेरिका के कई पुराने सहयोगी इस बात पर अड़े हैं कि ग्रीनलैंड बिकने वाला नहीं है, साथ ही उन्होंने वाशिंगटन को समाधान पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया। सोशल मीडिया पर एक बयान में, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि इस गुट की “लड़ाई छेड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है” लेकिन वो “अपने रुख पर कायम रहेगा।”

व्हाइट हाउस ने इस रणनीतिक आर्कटिक द्वीप पर बलपूर्वक नियंत्रण करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। जब डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन से पूछा गया कि क्या ट्रंप ग्रीनलैंड पर आक्रमण कर सकते हैं, तो उन्होंने सोमवार को कहा कि “जब तक राष्ट्रपति खुद कोई फैसला नहीं लेते, तब तक आप कुछ भी नहीं कह सकते।”

ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने भी सोमवार को तनाव कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इसका समाधान शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए से किया जा सकता है और किया जाना चाहिए।” उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें सैन्य कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।

ग्रीनलैंड में अमेरिकी धमकियों का कड़ा विरोध हो रहा है। हाल के दिनों में बढ़े तनाव का संकेत देते हुए हजारों ग्रीनलैंडवासियों ने सप्ताहांत में अपने द्वीप पर कब्जा करने के किसी भी प्रयास के विरोध में प्रदर्शन किया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडरिक नीलसन ने सोमवार को फेसबुक पोस्ट में कहा कि टैरिफ की धमकियों से उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा।

उन्होंने लिखा, “हम दबाव में नहीं आएंगे।” इस बीच ग्रीनलैंड की व्यापार, खनिज, ऊर्जा, न्याय और समानता मंत्री नाजा नथानिएलसन ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि टैरिफ की धमकी पर सहयोगियों की फौरी प्रतिक्रिया से वो प्रभावित हुईं और कहा कि इससे पता चलता है कि देशों को एहसास है कि “ये ग्रीनलैंड से कहीं अधिक बड़ा मुद्दा है।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत से देश इस बात से डरते हैं कि अगर वे ग्रीनलैंड को जाने देते हैं, तो आगे क्या होगा?” ट्रंप ने नॉर्वे के नेता को भेजे गए संदेश में नोबेल पुरस्कार को तनाव बढ़ाने का कारण बताया।

नॉर्वे सरकार द्वारा जारी गहर स्टोर को ट्रंप के रविवार के संदेश कुछ यूं था, “ये देखते हुए कि आपके देश ने मुझे आठ से अधिक युद्धों को रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं देने का निर्णय लिया है, अब मुझे केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती, हालांकि ये हमेशा सर्वोपरि रहेगी, बल्कि अब मैं इस बारे में सोच सकता हूं कि अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है।”

संदेश के आखिर में लिखा है, “जब तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूर्ण नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है।” नॉर्वे के नेता ने कहा कि ट्रंप का संदेश उनके और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की ओर से भेजे गए एक पूर्व संदेश का जवाब था, जिसमें उन्होंने टैरिफ घोषणा का विरोध किया था और तनाव कम करने की जरूरत पर बल दिया था। उन्होंने तीनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर बातचीत का प्रस्ताव रखा था।

नॉर्वे के नेता ने एक बयान में कहा, “ग्रीनलैंड पर नॉर्वे का रुख स्पष्ट है। ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और नॉर्वे इस मामले में डेनमार्क साम्राज्य का पूर्ण समर्थन करता है।” उन्होंने आगे कहा, “नोबेल शांति पुरस्कार के संबंध में मैंने स्पष्ट रूप से समझाया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप भी शामिल हैं, कि ये पुरस्कार एक स्वतंत्र नोबेल समिति द्वारा दिया जाता है, न कि नॉर्वे सरकार द्वारा।”

नॉर्वे की नोबेल समिति एक स्वतंत्र निकाय है जिसके पांच सदस्यों की नियुक्ति नॉर्वे की संसद द्वारा की जाती है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्विट्जरलैंड के दावोस में पत्रकारों के साथ बातचीत में ग्रीनलैंड के मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप के नजरिए का बचाव किया।दावोस इस हफ्ते विश्व आर्थिक मंच की मेजबानी कर रहा है।

बेसेंट ने नॉर्वे को लिखे राष्ट्रपति के पत्र के बारे में कुछ भी न जानने की बात कहने के तुरंत बाद कहा, “मुझे लगता है कि ये पूरी तरह से निराधार है कि राष्ट्रपति नोबेल पुरस्कार के कारण ऐसा कर रहे हैं।” बेसेंट ने जोर देकर कहा कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हम अपनी सुरक्षा किसी और को नहीं सौंपने जा रहे हैं।” ट्रंप ने खुले तौर पर शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जताई है, जिसे समिति ने पिछले साल वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया था। पिछले हफ्ते मचाडो ने अपना नोबेल पदक ट्रंप को सौंपा था, जिन्होंने कहा कि वे इसे अपने पास रखने की योजना बना रहे हैं, हालांकि समिति ने कहा है कि पुरस्कार रद्द, हस्तांतरित या किसी और के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप का कहना है कि वो टैरिफ को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे, अपने नए टैरिफ की धमकी में ट्रंप ने संकेत दिया कि ये पिछले हफ्ते यूरोपीय देशों द्वारा ग्रीनलैंड में प्रतीकात्मक संख्या में सैनिकों की तैनाती के प्रतिशोध में लगाए जा रहे हैं, हालांकि उन्होंने ये भी संकेत दिया कि वे डेनमार्क के साथ बातचीत के लिए टैरिफ को बतौर हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।

यूरोपीय सरकारों ने कहा कि सैनिक आर्कटिक सुरक्षा का आकलन करने के लिए द्वीप पर गए थे, जो रूस और चीन के दखल के बारे में ट्रंप की अपनी चिंताओं के जवाब का हिस्सा था। लक्षित आठ देशों में से छह 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ का हिस्सा हैं, जो व्यापार के मामले में एकल आर्थिक क्षेत्र के रूप में कार्य करता है।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने रविवार को कहा कि ब्लॉक के नेताओं ने “किसी भी प्रकार के दबाव के खिलाफ खुद का बचाव करने की तत्परता” जताई। उन्होंने गुरुवार शाम को एक शिखर सम्मेलन की घोषणा की।

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