Makar Sankranti: मकर संक्रांति के शुभ मौके पर, लाखों श्रद्धालु बुधवार सुबह कड़ाके की ठंड के बावजूद पवित्र नदियों के किनारे जमा हुए और आस्था की डुबकी लगाई। मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है। प्रयागराज में भीं संगम पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां चल रहे माघ मेले के दूसरे और अहम स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु इकट्ठा हुए।
अधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं, माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि “अभी जैसा कि आप देख सकते हैं की लगातार जो है श्रद्धालुओं का आगमन होता जा रहा है और हमारे सारे घाट लगभग फुल चल रहे हैं और अभी सुबह आठ बजे तक लगभग 15 साख श्रद्धालुओं ने हमारे समस्त सातों सेक्टरों में स्नान कर लिया है।
एसपी एनके पांडे ने कहा कि “हम लोगों ने पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम किए हुए हैं। हमारी जल पुलिस तैनात है, सिविल पुलिस तैनात है, पीएसी के जवान हैं, हमारे एटीएस के जवान भी हैं, एनडीआरएफ की टीमें हैं, आरएएफ के लोग लगे हुए हैं और जगह-जगह पर यातायात के पुलिस कर्मी भी हैं जो श्रद्धालुओं को गाइड कर रहे हैं पार्किंग में जाने के लिए और श्रद्धालुओं की भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए, हमने ‘नो-व्हीकल जोन’ भी घोषित किया है ताकि श्रद्धालु मेले में पैदल आएं उनको कोई असुविधा न हो।”
श्रद्धालुओं ने इंतजामों की तारीफ करते हुए, माघ मेले की तैयारियों की तुलना कुंभ मेले से की। शंखों की आवाज के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने वाराणसी के प्राचीन घाटों पर भी पवित्र स्नान किया। अयोध्या में भी श्रद्धालुओं ने शहर के मंदिरों में पूजा-अर्चना करने से पहले सरयू नदी में पवित्र स्नान किया। हरिद्वार में हर की पौड़ी पर भी हजारों लोगों ने कड़ाके की ठंड के बीच गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। मध्य प्रदेश के जबलपुर में श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी के किनारे ग्वारीघाट पर पवित्र स्नान किया। फिर पूजा-अर्चना कर दान-पुण्य के काम किए।
पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24 परगना के गंगासागर में, गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मकर संक्रांति मुख्य रूप से फसलों का त्योहार है, जिसे पूरे भारत में अलग-अलग नामों और अनोखे क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। यहां ये चार दिनों का त्योहार होता है, जिसमें नई फसल के चावल से खास पकवान बनाए जाते हैं।
गुजरात में इसे उत्तरायण के नाम से जाना जाता है, जब आसमान पतंगों से भर जाता है और परिवार दावत और मौज-मस्ती के लिए एक साथ होते हैं। असम में इसे माघ बिहू के रूप में मनाया जाता है – जिसमें लोग मिल जुलकर दावतें देते हैं और अलाव जलाए जाते हैं। ये आमतौर पर हर साल 14 जनवरी को पड़ता है। माना जाता है कि संक्रांति के बाद सर्दी धीरे धीरे कम हो जाती है और दिन लंबे होने लगते हैं।