Punjab: मोगा का रणसिंह कलां बना ‘मॉडल गांव’, पिछले छह साल से किसी भी किसान ने नहीं जलाई पराली

Punjab:  पंजाब के मोगा जिले का एक छोटा सा गांव रणसिह कलां दूसरों के लिए मिसाल बन रहा है। यहां किए जा रहे सतत विकास के काम लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। सबसे खास बात ये कि पिछले छह सालों में इस गांव के किसी भी किसान ने पराली नहीं जलाई है।

रणसिह कलां गांव के लोग दिख रहे बदलाव का सेहरा अपने सरपंच के सिर बांधते हैं। गांव की गलियां साफ-सुथरी नजर आती हैं और कूड़े का नामों-निशान नजर नहीं आता। यहां के किसानों ने अधिकारियों के आदेश देने से बहुत पहले ही पराली जलाना बंद कर दिया था।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में गांव का दौरा किया और वे कहते दिखे कि रणसिह कलां ने एक मिसाल कायम की है, जिसे पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए।

रणसिह कलां के लोग अपने गांव की कामयाबी पर गर्व महसूस करते हैं। वे कहते हैं कि मजबूत स्थानीय नेतृत्व और सामुदायिक पहलों से पूरे भारत में गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है।

रणसिह कलां गांव के सरपंच प्रीत इंदर पाल सिंह मिंटू ने कहा कि “रणसिह कलां से किसानों को, रणसिह कलां से देश को सीखने की जरूरत है। रणसिह कलां एक पाठशाला है पूरे देश के लिए कि जिसने अकेले पराली पर नहीं काम किया, उसने अपने डेवलपमेंट पर भी काम किया है, गांव का विकास किया है। जैसे हमारा गांव देश का पहला ऐसा गांव है जहां ओपन ड्रेनेज नहीं होती।

हमारा सौ परसेंट गांव है सीवेज डाला हुआ है, उसका पानी भी ट्रीटेड होता है, ट्रीटमेंट प्लांट लगा हुआ है। ट्रीट किया हुआ पानी, सौ एकड़ उससे खेती करते हैं और हमारे जो तालाब थे, गंदे हो चुके थे पहले, उनको हमने खूबसूरत लेक का रूप दिया है, झील बनाई हैं अपने गांव में दो और इसी तरह अपने गांव में वातावरण को अच्छा करने के लिए पार्क का निर्माण किया है, तीन पार्क बने हुए हैं हमारे गांव में।”

इसके साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “मॉडल विलेज है, यहां की खेती के बारे में मैंने विस्तार से बताया है। पराली छह साल से जला नहीं रहे। अब पराली को बोझ नहीं वरदान बना दिया है। लेकिन केवल खेती-बाड़ी नहीं, गांव के विकास का जो मॉडल है रणसिह कलां का, उसको भी मैं पूरे देश के सामने रखूंगा। ये एक गांव का आदर्श विकास, जैसे मिंटू यहां सरपंच है, उनके साथ में देखा वो कैसा होता है, ये भी पूरे देश को बताऊंगा। इस गांव में आकर मैं धन्य हुआ, मैं बहुत प्रसन्न हूं।”

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