Diwali: मिट्टी का एक साधारण सा टुकड़ा… हुनरमंद हाथों और पारंपरिक कला के मेल से रोशनी बिखेरने वाले खूबसूरत दीये का रूप ले लेता है। दिवाली नजदीक आते ही राजस्थान के बीकानेर में कुम्हारों के चाक तेजी से घूमने लगे हैं। यहां के कारीगर दिन-रात मेहनत कर हजारों दीये तैयार करने में जुटे हैं। पारंपरिक दीयों के साथ-साथ आकर्षक डिजाइन और अलग-अलग आकार के दीये भी बनाए जा रहे हैं।
इन्हीं कारीगरों में ठाकुर और उनकी पत्नी भी शामिल हैं। दोनों दिव्यांग हैं और पिछले तीन दशकों से अधिक समय से दीये बनाने के काम से अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं। फिलहाल उनकी पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन ठाकुर ने हिम्मत नहीं हारी है। वह अकेले ही अपने काम में जुटे हैं और इस उम्मीद में हैं कि इस बार दिवाली पर उनके बनाए दीयों को अच्छा बाजार मिलेगा।
दरअसल, लंबे समय से मंदी का सामना कर रहे मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों को इस साल कारोबार में सुधार की उम्मीद नजर आ रही है। बीकानेर के बाजार भी अब दिवाली के रंग में रंग चुके हैं। दुकानों पर पारंपरिक दीयों से लेकर डिजाइनर दीपक, मिट्टी के बर्तन, घंटियां और आकर्षक सजावटी सामानों की भरमार है।
इस बार बाजार से मिल रहे शुरुआती संकेत कारीगरों के लिए उत्साहजनक हैं। बड़ी संख्या में ग्राहक स्थानीय कुम्हारों से सीधे दीये और मिट्टी से बनी दूसरी सजावटी वस्तुएं खरीद रहे हैं।
रोशनी के त्योहार की तैयारियों के बीच मिट्टी के ये छोटे-छोटे दीये घरों तक पहुंच रहे हैं। वहीं, इनकी हर बिक्री कारीगरों की मेहनत को नई पहचान देने के साथ उनके चेहरों पर मुस्कान भी ला रही है। इन कारीगरों के लिए हर बिकता हुआ दीया सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि बेहतर दिवाली और उज्ज्वल भविष्य की एक नई उम्मीद भी है।