Ramnagar: उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान अपने बाघों के लिए मशहूर है, हालांकि इन बड़े जानवरों पर सबका ध्यान होने के बीच, प्रकृतिविदों ने उन पक्षियों को लेकर चिंता जताई है जो कभी इस पूरे इलाके में आम तौर पर दिखाई देते थे। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कॉर्बेट के कुछ हिस्सों में मोर, इंडियन रेड जंगलफाउल यानी जंगली मुर्गे और कालीज तीतर जैसी पक्षियों की प्रजातियां अब पहले के मुकाबले कम दिखाई दे रही हैं।
सीनियर नेचर गाइड और पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट ने कहा कि “जोे ग्राउंडबर्ड्स हैं, जो टेरोस्टोरियल बर्ड्स हैं, उनमें थोड़ा सा, जैसे फाउल्स हैं, फाउल्स में हमारे वहां जैसे कि कलीज फेजेंट्स है, रेड जंगल फाउल है, पी फाउल हैं, ये फाउल्स जोे हैं, पिछले सत्र की अगर हम बात करें तो इनकी संख्या में कमी नजर आई और लगा कि कुछ जलवायु का कोई परिवर्तन है, उसका प्रभाव है या कोई बीमारी है, जिसकी वजह से ये कम नजर आ रहे हैं।”
इमरान खान, वन्यजीव विशेषज्ञ और प्रकृति विज्ञानी “आश्चर्य की बात है कि टाइगर साइटिंग हो जा रही है, दुनिया भर के अच्छे-अच्छे काम हो रहे हैं कॉर्बेट के अंदर, लेकिन जो कॉमनेस्थ स्पीसीज हैं, जो सबसे ज्यादा मिला करती थीं, इंडियन पी फाउल है, रेड जंगल फाउल है, कलीज फेजेंट हैं, ये सब चीजें दिखना कम हो गई हैं कॉर्बेट में।” हालांकि सटीक वजह अब भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आवास में बदलाव, मौसम के पैटर्न और भोजन की उपलब्धता में परिवर्तन के साथ-साथ वन क्षेत्रों और उनके आसपास बढ़ते निर्माण कार्य, इन पक्षियों के कम दिखाई देने के पीछे के संभावित कारण हो सकते हैं।
इसके साथ ही वन्यजीव विशेषज्ञ और वन्यजीव प्रेमी सुमंता घोष ने बताया कि “पी फाउल हो गया, जैसे रेड जंगल फाउल, खलीच, वो तो काफी अंदर पाया जाता था जंगल में या गांव उसके बाउंड्री पे, ठीक है। अब आप गांव या उसकी बाउंड्री में पूरे एरिया को देखें, गांव की बाउंड्री में लगभग सब कुछ बिक चुका है। कौन आ गया है गांव की बाउंड्री में, कोई होटल या कोई रिसॉर्ट आ गया है, जो कि बहुत ज्यादा इको-फ्रेंडली बिल्कुल ही नहीं है। अगर आपको पता करना है कि क्या प्रॉब्लम है तो उसके लिए शोध बहुत जरूरी है। तो हम सब को बहुत ऊंची आवाज में कहना चाहिए कि इसमें रिसर्च करें।” ))
पर्यावरणविदों ने इन पक्षियों के कम दिखाई देने की वजहों पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की है। वहीं वन अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक का कहना है कि “ये जो इश्यू है, अगर सच में इतना बड़ा है तो हम विभाग के स्तर पर हमारे उच्च अधिकारियों के संज्ञान में ये डालेंगे और नियमानुसार जो कार्रवाई बनती है, वो निश्चित रूप से हम करेंगे।”
तराई पश्चिमी वन प्रभाग डीएफओ, पुनीत तोमर ने कहा कि “जो हमारा, थोड़ा बहुत जो आपने वीडियोज दिखाए थे नेचुरलिस्ट का, उन्होंने जो बोला है, उसको हमने संज्ञान में लिया है। तो इसमें पत्राचार करके, थोड़ा जो हमारा फील्ड स्टाफ है, उनसे भी थोड़ा कॉमेंट्स लेके, उच्च स्तर को इससे अवगत कराया जाएगा और अगर इसमें शोध की आवश्यकता होगी, और शोध जिस क्षेत्र में करना है, उसमें कार्रवाई की जाएगी।” पक्षी प्रजातियों की दृश्यता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में अब इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि क्या ये बदलाव अस्थायी हैं या फिर कही कॉर्बेट की जैव विविधता किसी बड़े बदलाव की ओर तो इशारा नहीं कर रही है?