Freida Pinto: सिनेमा में परफेक्ट महिलाओं से आगे बढ़ने की जरूरत, फ्रीडा पिंटो ने बताया कैसे हों महिला किरदार

Freida Pinto: अभिनेत्री फ्रीडा पिंटो ने कहा कि 2008 में ऑस्कर विजेता ब्रिटिश फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद से उन्होंने भारत में कई खूबसूरत बदलाव देखे हैं। उनके मुताबिक अब ऐसी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, जो ‘सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों से बंधी नहीं हैं या बहुत रूढ़िवादी’ नहीं हैं।

पिंटो उन नौ प्रमुख भारतीय महिलाओं में से एक हैं, जिन्हें 2027 के पिरेली कैलेंडर में शामिल किया गया है। उनके साथ अभिनेत्री अदिति राव हैदरी, संगीतकार अनुष्का शंकर, कवयित्री रूपी कौर, मॉडल लक्ष्मी मेनन और टीवी होस्ट पद्मा लक्ष्मी भी इसमें शामिल हैं। लॉन्च किए गए इस कैलेंडर में फोटोग्राफर रघु राय, अवनी राय और सोल्वे सनडस्बो के काम को जगह दी गई है। अपने इतिहास में पहली बार, इस कैलेंडर ने भारत को इस प्रोजेक्ट के केंद्र में रखा है।

सोल्वे सनडस्बो के लिए गहरे गुलाबी रंग की ड्रेस पहनकर, फूलों से लदी बोगनवेलिया के नीचे पोज देने वालीं पिंटो ने कहा कि पिछले लगभग 20 वर्षों में फिल्म और टेलीविजन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का तरीका काफी बदल गया
है।

लॉन्च के दौरान उन्होंने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा, “इसमें कई खूबसूरत बदलाव आए हैं, और कुछ बदलाव तो वाकई बहुत स्वागत योग्य हैं, खासकर फिल्म और टेलीविजन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व। अब हम हर तरह की महिलाओं को देख सकते हैं, न सिर्फ उन्हें जो अपनी जिम्मेदारियों से बंधी हैं या बहुत रूढ़िवादी हैं, बल्कि उन महिलाओं को भी जिनमें कई तरह की जटिलताएं हैं और जो एकदम ‘परफेक्ट’ नहीं हैं।”

पिंटो ने कहा, “मुझे उन चीजों में ज्यादा दिलचस्पी है जो एकदम परफेक्ट नहीं हैं। जो चीजें परफेक्ट होती हैं, वे उबाऊ लगती हैं और उनसे जुड़ाव महसूस नहीं होता।”

‘राइज ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’, ‘इम्मॉर्टल्स’ और वुडी एलेन की ‘यू विल मीट अ टॉल डार्क स्ट्रेंजर’ जैसी हॉलीवुड हिट फिल्मों में काम कर चुकीं इस अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि देश में “रचनात्मकता का एक बड़ा विस्फोट” देखने को मिलेगा, जहां के युवा “नए विचारों को सामने लाने और बदलाव लाने की इच्छा रखने” में बहुत आगे हैं। उन्होंने कहा, “विचारों से बहुत सारी रचनात्मकता पैदा होती है। और मुझे उम्मीद है कि हमें ऐसी और भी बहुत सी चीजें देखने को मिलेंगी। मुझे उम्मीद है कि यह विकास रुकेगा नहीं। मुझे उम्मीद है कि इसे नकारा या दबाया नहीं जाएगा। मेरी तो बस यही कामना है कि यह पूरी तरह से निखर कर सामने आए।”

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