CM Yogi: यूपी का ‘रूपम’ बनेगा AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, क्षमता विकास में उत्तर प्रदेश, देश में प्रथम- मुख्यमंत्री योगी

CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोक सेवक की सफलता फाइलों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसके पास आया आम नागरिक संतुष्ट होकर लौटा या नहीं। एक बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और किसी सामान्य नागरिक की समस्या का समयबद्ध समाधान हो, यही लोक सेवा का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने लोकप्रिय धारावाहिक ‘ऑफिस-ऑफिस’ का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवस्था में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जहां आम आदमी अपने छोटे-छोटे कामों के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकता रहे। इसके लिए प्रशासन को सक्षम, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना श्रृंखला-2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। मुख्यमंत्री योगी और केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने संयुक्त रूप से ‘उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स’ (UNNATI Capability Index) और ‘नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क’ (National Curriculum Design Framework) का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास को प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव का राष्ट्रीय अभियान बताते हुए उत्तर प्रदेश में इसके विस्तार के लिए तीन प्रमुख घोषणाएं कीं। उन्होंने क्षमता विकास से जुड़े संस्थान को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने, पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने तथा अधिकारियों-कर्मचारियों की दक्षता को उनकी जिम्मेदारियों और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

‘ऑफिस-ऑफिस’ सीरियल जैसी स्थिति से मुक्त हो आम नागरिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था की विफलता तब सामने आती है, जब कोई विभाग यह मानकर अपनी जिम्मेदारी से अलग हो जाता है कि संबंधित काम किसी दूसरे विभाग का है। इसी तरह, जब कोई अधिकारी या कर्मचारी नागरिक की समस्या को समझने और उसका समाधान करने के बजाय उसे टालता है, तो जनता का व्यवस्था से विश्वास उठने लगता है।

उन्होंने ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें एक सामान्य नागरिक अपने काम के लिए कार्यालय-दर-कार्यालय भटकता रहता है और उसकी सुनवाई नहीं होती। उसकी बेबसी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन में ऐसी स्थिति को बदलने के लिए जरूरी है कि सही व्यक्ति को सही जिम्मेदारी मिले, उसे समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाए और उसके दायित्वों के प्रति जवाबदेही तय हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी कर्मचारी को पदोन्नति और अधिकारों की जानकारी तो होती है, लेकिन कई बार उसके दायित्वों के प्रति अपेक्षित जागरूकता नहीं होती। योग्य और जिम्मेदार कार्मिकों की तैनाती तथा निरंतर क्षमता विकास से प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

फाइलों के निस्तारण से नहीं, नागरिक की संतुष्टि से तय होगी सफलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक सेवक की सफलता इस बात में है कि उसके पास आया बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद नागरिक समयबद्ध समाधान प्राप्त कर संतुष्ट होकर लौटे। यदि किसी नागरिक को न्याय या समाधान के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो प्रशासनिक प्रक्रिया का उद्देश्य पूरा नहीं होता।

उन्होंने कहा कि तकनीक शासन को गति दे सकती है, प्रक्रियाओं को सरल बना सकती है और निर्णयों को बेहतर बना सकती है, लेकिन व्यवस्था को संवेदनशील बनाने का काम कार्मिक का सेवा भाव करता है। इसलिए क्षमता विकास का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण पूरा कराना या प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि लोक सेवकों की कार्यशैली और नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में वास्तविक सुधार लाना होना चाहिए।

यूपी का ‘रूपम’ बनेगा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख पहल का उल्लेख किया। पहली पहल के तहत उन्होंने क्षमता विकास आयोग से डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (RUPAAM) को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स शासन की कार्यप्रणाली को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में लोक सेवकों को इन बदलावों के अनुरूप प्रशिक्षित करना जरूरी है।

दूसरी पहल के तहत ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगरपालिका परिषदों और नगर निगमों में कार्यरत कार्मिकों की क्षमता विकास व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्थानीय निकायों को सक्षम, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाना होगा। पंचायतें और नगर निकाय विकास की बुनियादी इकाइयां हैं, इसलिए वहां कार्यरत कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना आवश्यक है।

तीसरी पहल ‘राइट पर्सन, राइट रोल’ यानी सही पद पर सही अधिकारी की तैनाती से संबंधित है। मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि कार्मिकों की दक्षता, उपलब्धियों, सक्सेस स्टोरी और वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) को उनकी जिम्मेदारियों तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाए। इससे अधिकारी-कर्मचारियों को उनकी क्षमता के अनुरूप दायित्व सौंपने में मदद मिलेगी।

केवल डिग्री से नहीं आती कार्य करने की योग्यता
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए कहा कि केवल डिग्री और नियुक्ति पत्र किसी व्यक्ति को कार्य के लिए पूरी तरह योग्य नहीं बनाते। नई तकनीक को समझने, उसका सही उपयोग करने और निर्णयों के प्रभाव को जानने की क्षमता भी जरूरी है। इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण और क्षमता विकास की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि किसी परियोजना में तकनीकी समझ और व्यावहारिक दक्षता का अभाव आम लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए प्रशिक्षण का संबंध वास्तविक कार्यक्षेत्र की चुनौतियों और जिम्मेदारियों से होना चाहिए, ताकि अधिकारी-कर्मचारी केवल नियमों की जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि समस्याओं का व्यावहारिक समाधान भी कर सकें।

यूपी के 19.26 लाख कार्मिक iGOT से जुड़े, करीब चार करोड़ पाठ्यक्रम पूरे
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19 लाख 26 हजार सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। प्रदेश के कर्मचारी अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़ चुके हैं।

उन्होंने कहा कि क्षमता विकास की वास्तविक सफलता प्रशिक्षण के बाद लिए गए बेहतर निर्णयों, सरल हुई प्रक्रियाओं और नागरिकों को मिली बेहतर सेवाओं से मापी जानी चाहिए। उन्नति पोर्टल प्रशिक्षण संस्थानों को अपने अनुभव, विशेषज्ञता और श्रेष्ठ कार्यपद्धतियां साझा करने का अवसर देता है। इससे एक संस्थान के सफल प्रयोग दूसरे संस्थानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच लोक सेवकों को नई जरूरतों के अनुरूप तैयार करना समय की मांग है। तकनीक और प्रशिक्षण के समन्वय से प्रशासनिक निर्णयों की गुणवत्ता तथा सेवाओं की प्रभावशीलता में सुधार किया जा सकता है।

बीमारू से ग्रोथ इंजन बना यूपी, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में अपनी जीडीपी, बजट और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि, जल संसाधनों और युवा कार्यबल के बावजूद उत्तर प्रदेश अपनी संभावनाओं के अनुरूप उपलब्धियां हासिल नहीं कर पा रहा था। इसके पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति और क्षमता विकास का अभाव भी एक कारण था।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश के पास सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जबकि अब देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार, पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, 17 घरेलू हवाई अड्डों, सात शहरों में मेट्रो सेवा और प्रदेश में संचालित देश की पहली रैपिड रेल का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि कृषि विकास दर को आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता मिली है। आवास, शौचालय, मुफ्त खाद्यान्न, हर घर नल योजना और बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक पहुंचना चाहिए।

इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण में विभागीय समन्वय और प्रशिक्षण की भूमिका
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक बच्चों के लिए गंभीर चुनौती रही इंसेफेलाइटिस का उदाहरण देते हुए बताया कि इस समस्या को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मानने के बजाय कई विभागों को एक साथ अभियान से जोड़ा गया। स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, दिव्यांगजन कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी इसमें भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पैरामेडिक्स, बाल रोग विशेषज्ञों, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों तक के लिए प्रशिक्षण तथा समन्वय की व्यवस्था की गई। स्वच्छता, शुद्ध पेयजल और जागरूकता पर भी जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जब विभिन्न विभाग अपनी जिम्मेदारी समझकर मिलकर काम करते हैं, तो जटिल समस्याओं का समाधान भी संभव हो जाता है।

क्षमता विकास में यूपी प्रथम, राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर
कार्यक्रम में राज्यों के क्षमता विकास संबंधी प्रयासों और प्रशासनिक उपलब्धियों के मूल्यांकन में उत्तर प्रदेश को प्रथम स्थान मिलने की जानकारी दी गई। राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने संबंधित राज्यों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।

उत्तर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों को तीन श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया। श्रेणी ‘क’ में गृह विभाग को प्रथम और बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को द्वितीय पुरस्कार मिला। श्रेणी ‘ख’ में उच्च शिक्षा विभाग प्रथम तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वितीय स्थान पर रहा। श्रेणी ‘ग’ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को प्रथम और प्रशासनिक सुधार विभाग को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। गृह विभाग द्वारा एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करने का भी उल्लेख किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूपी के प्रदर्शन को सराहा
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्षमता विकास में उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन की सराहना करते हुए राज्य प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। दस्तावेजों के सत्यापन के लिए राजपत्रित अधिकारियों पर निर्भरता समाप्त करने, सरकारी भर्तियों में साक्षात्कार की व्यवस्था खत्म करने और रोजगार मेलों जैसे कदमों का उद्देश्य युवाओं तथा नागरिकों के प्रति शासन का विश्वास मजबूत करना रहा है।

उन्होंने बताया कि iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर देशभर में 1.70 करोड़ से अधिक अधिकारी-कर्मचारी पंजीकृत हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के 19 लाख से अधिक कार्मिक शामिल हैं। उन्नति पोर्टल से भी प्रदेश के बड़ी संख्या में प्रशिक्षण संस्थान जुड़े हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश सुशासन और क्षमता विकास के क्षेत्र में अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता रहेगा।

‘नागरिक देवो भवः’ लोक सेवा का मूलमंत्र
क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में अधिकारियों को पहल करने, निर्णय क्षमता बढ़ाने, नेतृत्व विकसित करने और तकनीक के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नागरिक देवो भवः’ के मूलमंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक सेवकों को नागरिकों की जरूरतों और सेवा भावना पर केंद्रित रहना चाहिए।

19 लाख से अधिक कार्मिक iGOT पोर्टल पर पंजीकृत: शशि प्रकाश गोयल, मुख्य सचिव
मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल ने बताया कि प्रदेश में 19 लाख से अधिक कार्मिक iGOT पोर्टल पर पंजीकृत हैं और लगभग पौने चार करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने क्षमता विकास को विभागीय कार्य निष्पादन से जोड़ने, प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने, संकाय विकास, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीक और एआई के उपयोग तथा प्रशिक्षण परिणामों के मूल्यांकन को प्रदेश की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल, आयोग की सदस्य डॉ. अल्का मित्तल, आयोग के सचिव जगदीप गुप्ता तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के महानिदेशक एम. देवराज सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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