Lucknow: बल्क ट्रांसफर से आने वाले रक्त की भी होगी गुणवत्ता जांच, UPFSDA ने भेजा प्रस्ताव

Lucknow:  रक्त के जरिए हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। इसलिए मरीज को चढ़ाए जाने वाले रक्त की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। रक्तदाता से रक्त लेने, उसकी जांच करने, सुरक्षित रखने और मरीज को देने तक हर स्तर पर तय मानकों का पालन होना चाहिए। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) ने दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में मंगाए जाने वाले रक्त और उसके अवयवों की गुणवत्ता जांच की व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है।

आयुक्त एफएसडीए डॉ रोशन जैकब की ओर से बल्क ट्रांसफर से आने वाली रक्त यूनिटों की प्राप्तकर्ता केंद्र पर भी जांच कराने के लिए राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (एनबीटीसी) को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव के तहत प्रत्येक खेप की कम से कम एक प्रतिशत यूनिट अथवा प्रति खेप न्यूनतम एक यूनिट, जो भी अधिक हो, की जांच कराने की सिफारिश की गई है। प्रस्ताव है कि यह जांच स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में राजकीय रक्त केंद्र में कराई जाए। इसका उद्देश्य दूसरे राज्यों से आने वाले रक्त की गुणवत्ता की पुष्टि करना और संक्रमित या निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले रक्त के मरीजों तक पहुंचने का जोखिम कम करना है।

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश के आदेश पर मार्च 2026 में चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा संचालित 208 रक्त केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। इनमें 55 केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए। जांच में संक्रमण परीक्षण, तापमान नियंत्रित भंडारण के अभिलेखों के रखरखाव, तकनीकी स्टाफ, स्वच्छता और रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। विशेष रूप से दूसरे राज्यों से पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (पीआरबीसी) की बड़ी खेप मंगाने के दौरान जरूरी दस्तावेजों और गुणवत्ता सत्यापन से जुड़ी कमियां मिलीं। इसके बाद ये महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

बिना पर्याप्त दस्तावेजों के हो रहा था बल्क ट्रांसफर

निरीक्षण में कुछ रक्त केंद्रों पर बड़ी मात्रा में रक्त मंगाने का लिखित औचित्य, ट्रांसफ्यूजन-ट्रांसमिसिबल इन्फेक्शन (टीटीआई) जांच रिपोर्ट, डोनर फॉर्म और परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान बनाए रखने के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। दूसरे राज्यों के आपूर्तिकर्ता केंद्रों के लाइसेंस और वहां रक्त संग्रह तथा जांच के निर्धारित नियमों का पालन होने की पुष्टि करना भी चुनौतीपूर्ण पाया गया।बल्क ट्रांसफर के पैकेज पर स्पष्ट पहचान संबंधी जानकारी नहीं होने से भी स्थिति अस्पष्ट हो जाती है। कई बार प्राप्तकर्ता केंद्र के पास रक्त की जांच रिपोर्ट और तापमान नियंत्रित परिवहन के प्रमाण उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में यह सत्यापित करना मुश्किल हो जाता है कि रक्त भेजने वाले केंद्र ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रक्त एकत्र किया और उसकी जांच की है या नहीं।

बल्क ट्रांसफर की पूर्व सूचना नहीं मिलने से औषधि निरीक्षक प्राप्तकर्ता केंद्र की वास्तविक जरूरत, भंडारण क्षमता और तापमान नियंत्रण की व्यवस्था की समय पर जांच नहीं कर पाते। रक्त के जरिए गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका को देखते हुए इन कमियों को दूर करना जरूरी है, ताकि रक्त की गुणवत्ता और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

28 अक्टूबर 2015 के एनबीटीसी दिशा-निर्देशों के तहत आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता केंद्रों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। सामान्यतः आपूर्तिकर्ता केंद्र रक्त की संक्रमण जांच के लिए जिम्मेदार होता है, जबकि प्राप्तकर्ता केंद्र मरीज को रक्त देने से पहले क्रॉस-मैचिंग करता है। इसी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यूपीएफएसडीए ने प्राप्तकर्ता केंद्र पर भी बल्क ट्रांसफर से आने वाली यूनिटों की गुणवत्ता जांच कराने का प्रस्ताव रखा है।

हर यूनिट के साथ पायलट ट्यूब और टीटीआई रिपोर्ट जरूरी

यूपीएफएसडीए ने 21 अगस्त 2026 को पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी रक्त केंद्रों को निर्देश जारी किए। इनके अनुसार, दूसरे राज्यों से पीआरबीसी की बल्क आपूर्ति लेते समय प्रत्येक यूनिट के साथ मूल रक्त की कम से कम 30 सेंटीमीटर लंबी पायलट ट्यूब यानी तीन सेगमेंट प्राप्त करना अनिवार्य है। प्राप्त यूनिटों में से कम से कम एक प्रतिशत की जांच स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में राजकीय रक्त केंद्र में कराने और उसकी रिपोर्ट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक यूनिट के साथ टीटीआई जांच रिपोर्ट और डोनर फॉर्म की प्रति भी अनिवार्य होगी। फॉर्म में रक्तदान के बाद यूनिट को मूल केंद्र के बाहर उपयोग करने की सहमति दर्ज होनी चाहिए। परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान का रिकॉर्ड, पर्याप्त क्षमता वाले ब्लड स्टोरेज कैबिनेट और उनके तापमान का रिकॉर्ड दर्ज करने वाले थर्मोग्राफ की जानकारी भी उपलब्ध रखनी होगी। इससे रक्त के सुरक्षित हस्तांतरण और भंडारण की निगरानी की जा सकेगी।

एनबीटीसी से लेबलिंग, पूर्व सूचना और एसओपी की सिफारिश

राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था मजबूत करने के लिए यूपीएफएसडीए ने तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं। पहला, प्रत्येक यूनिट के साथ कम से कम दो पायलट ट्यूब सेगमेंट, कुल करीब 20 सेंटीमीटर लंबाई के, उपलब्ध कराए जाएं। दूसरा, यूनिट पर ‘बल्क ट्रांसफर्ड यूनिट’ अंकित करने के साथ आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता केंद्र का नाम, पता तथा लाइसेंस संख्या दर्ज हो, ताकि रक्त की पहचान और उसकी आपूर्ति के स्रोत का पता लगाया जा सके।तीसरा, प्राप्तकर्ता केंद्र को बल्क ट्रांसफर से पहले स्थानीय औषधि निरीक्षक को सूचना देना अनिवार्य किया जाए। इसके साथ प्रत्येक खेप के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और चेकलिस्ट तैयार करने की सिफारिश की गई है। इसमें रक्त बैग और पायलट ट्यूब की स्थिति, टीटीआई रिपोर्ट, दोनों केंद्रों का विवरण, ट्रांसफर की समय-सीमा और परिवहन के दौरान तापमान का रिकॉर्ड शामिल होगा।

संक्रमण जांच से लेकर रिकॉर्ड संधारण तक सख्ती

प्रदेश के रक्त केंद्रों में आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर सभी रक्त नमूनों की संक्रमण जांच 100 प्रतिशत एलिसा (ELISA) अथवा केमिलुमिनेसेंस तकनीक से करना अनिवार्य किया गया है। डोनर का आधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाइल नंबर डोनर रजिस्टर में तथा मरीज या उसके तीमारदार का आधार कार्ड और लिंक मोबाइल नंबर इशू रजिस्टर में दर्ज करना होगा। पायलट ट्यूब और मरीज के रक्त नमूने कम से कम सात दिन सुरक्षित रखने होंगे। रक्त और उसके अलग-अलग अवयवों के लिए निर्धारित तापमान पर पृथक भंडारण, थर्मोग्राफ रिकॉर्ड, स्वच्छता और सभी आवश्यक उपकरणों का साल में कम से कम एक बार कैलिब्रेशन भी अनिवार्य है।

स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) की निर्धारित शुल्क सूची प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करनी होगी। डोनर रजिस्टर, मास्टर रजिस्टर, इशू रजिस्टर, ब्लड बैग और स्टॉक रजिस्टर अपडेट रखने होंगे। रक्त की प्राप्ति, जांच और मरीज को जारी करने का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखते हुए रक्तदाता से मरीज तक हर यूनिट की जानकारी उपलब्ध रखनी होगी। इससे किसी यूनिट के संबंध में शिकायत या संदेह होने पर उसके स्रोत और जांच से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सकेगी। तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति में रक्त केंद्र के संचालन पर रोकने है। गंभीर अनियमितताओं या अनिवार्य रिकॉर्ड में कमी पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।

चैरिटेबल ट्रस्टों के लाइसेंस पर भी कड़े मानक

रक्त केंद्रों के नए लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए ट्रस्ट का कम से कम दो वर्षों से कार्यरत होना, पर्याप्त संसाधन होना और किसी एक व्यक्ति या परिवार का नियंत्रण नहीं होना आवश्यक किया गया है। ट्रस्ट के उद्देश्यों में स्वास्थ्य एवं रक्ताधान सेवाओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। आवेदन के साथ पैन कार्ड, आयकर अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र, सदस्यों के नाम-पते और पहचान संबंधी दस्तावेज, पिछले दो वर्षों की धर्मार्थ गतिविधियों का विवरण तथा ऑडिट रिपोर्ट देनी होगी। ट्रस्ट द्वारा संचालित सभी रक्त केंद्रों के नाम, पते, लाइसेंस संख्या, वैधता और निलंबन या निरस्तीकरण संबंधी विवरण भी देना होगा। किसी सदस्य का दूसरे रक्त केंद्र संचालक ट्रस्ट से जुड़ाव होने पर उसका विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है। रक्त केंद्र के तकनीशियन या टेक्निकल सुपरवाइजर की डीएमएलटी योग्यता होने/पंजीकरण होने पर प्रमाणपत्र का यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी बोर्ड से अनुमोदन भी आवश्यक है।

मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना लक्ष्य

यूपीएफएसडीए की इस पहल का उद्देश्य रक्त की उपलब्धता, उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है। बल्क ट्रांसफर की निगरानी, संक्रमण जांच रिपोर्ट, तापमान नियंत्रित परिवहन और सुरक्षित भंडारण के रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रक्त निर्धारित मानकों के अनुसार प्राप्त और सुरक्षित रखा गया है या नहीं। प्राप्तकर्ता केंद्र पर नमूनों की जांच, औषधि निरीक्षक को पूर्व सूचना और रक्तदाता से मरीज तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की व्यवस्था से रक्त केंद्रों की जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, एनबीटीसी के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और रक्त के जरिए फैलने वाले संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

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