Ujjain: नवरात्रि के दौरान उज्जैन में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के साथ एक खास परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे ‘नगर पूजा’ कहा जाता है। इस परंपरा के तहत पूरे शहर में सुख-समृद्धि और शांति के लिए पूजा की जाती है, इस जुलूस का नेतृत्व जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक करते हैं। जुलूस उज्जैन के प्रमुख मंदिरों से होकर गुजरता है। इस दौरान चौबीस खंभा माता मंदिर में देवी को मदिरा (शराब) चढ़ाई जाती है। माना जाता है कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और राजा विक्रमादित्य के समय से चली आ रही है।
अंकित मालवीय, पुजारी, चौबीस खंबा माता मंदिर “ये महाष्टमी की पूजा होती है, क्लेक्टर द्वारा चढ़ाई जाती है। ये राजा विक्रमादित्य के टाइम से चली आ रही है। ‘चौबीस खंभा माता मंदिर’ ‘महाकाल वन’ का मुख्य द्वार है महामाया और महालया दोनों द्वार पर दोनों देवियां विराजमान हैं। यहां पर कलेक्टर द्वारा पूजाएं चढ़ाई जाती हैं, मदिरा की धार लगता है माता जी को और 27 किलोमीटर की परिक्रमा रहती है।”
उज्जैन में नगर पूजा का जुलूस करीब 27 किलोमीटर तक चलता है। इस दौरान पूरे रास्ते एक पात्र से शराब उड़ेली जाती है। मान्यता है कि इस परंपरा को निभाने से शहर बुरी शक्तियों से सुरक्षित रहता है।
रौशन कुमार सिंह, जिलाधिकारी “शहर वासियों की शुभकामना के लिए उनकी बेहतरी के लिए ये पूजा हर वर्ष होता है और आज इसी क्रम में आज यहां पर विधि-विधान के साथ पूजा की गई है। आप देख पा रहे हैं श्रद्धालुओं में पूरा हर्ष-उल्लास है और नगर यात्रा जो है वो निकल रही है और पूरे शहर में यात्रा निकलेगी।”
मध्य प्रदेश के उज्जैन और अन्य तीर्थ स्थलों पर शराब की बिक्री और सेवन पर रोक है। इसके बावजूद, उज्जैन के कुछ मंदिरों में धार्मिक परंपरा के तहत देवी-देवताओं को शराब चढ़ाई जाती है, नगर पूजा का जुलूस शाम को महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर समाप्त होता है।