Sharad Navratri: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र और विजयादशमी का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं, नवमी के दिन कन्या पूजन और दशहरे पर रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है। इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण नवमी और दशहरा एक ही दिन पड़ने को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है। ऐसे में कन्या पूजन, हवन और रावण दहन के शुभ समय को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं।
कन्या पूजन का क्या है महत्व?
नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन की परंपरा है। इस दौरान नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन किया जाता है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कई परिवारों में नवमी के दिन हवन और पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
दशहरे पर क्यों किया जाता है रावण दहन?
विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। इस दिन देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व अहंकार, अन्याय और बुराई का त्याग कर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
शुभ मुहूर्त जानना क्यों जरूरी?
नवमी और दशमी की तिथि, उनके आरंभ और समापन के समय तथा स्थानीय पंचांग के आधार पर पूजा का मुहूर्त निर्धारित किया जाता है। कन्या पूजन और हवन के लिए नवमी तिथि का ध्यान रखना चाहिए, जबकि विजयादशमी की पूजा और रावण दहन के लिए स्थानीय परंपरा तथा पंचांग के अनुसार समय देखा जाता है।
श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि पूजा-अर्चना से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय विद्वान से तिथि और शुभ मुहूर्त की पुष्टि कर लें, ताकि धार्मिक अनुष्ठान सही समय पर किए जा सकें।