New Delhi: एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को रक्षा मंत्री राजनाथ ने किया सम्मानित

New Delhi: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापान में हाल ही में हुए एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले सशस्त्र बलों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। सशस्त्र बलों से जुड़े खिलाड़ियों ने इस खेलों में 27 पदक जीते जिसमें छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य पदक शामिल है।

राजनाथ ने इस दौरान 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए अभी से सुनियोजित तैयारी करने और प्रदर्शन में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ बातचीत में प्रतिभाशाली एथलीटों की पहचान करने और उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं के साथ पोषित करने में मिशन ओलंपिक विंग द्वारा निभाई गई भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

तीनों सेनाओं के कुल 92 खिलाड़ियों ने 19 स्पर्धाओं में भाग लिया और 27 पदक जीते। इसमें सेना के खिलाड़ियों का योगदान 20 पदकों (छह स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य) का रहा। यह भारत के कुल पदकों में लगभग 24 प्रतिशत है। इस अवसर पर उपस्थित सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी उन्हें सम्मानित भी किया।

भारतीय दल ने कुल 85 पदक अपने नाम किए, जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि महिला खिलाड़ियों का बढ़ता योगदान विशेष रूप से उत्साहजनक रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों में सेना की चार महिला मुक्केबाजों ने चार स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया, जबकि एशियाई खेलों में सेना की महिला खिलाड़ियों ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि पदक जीतने तक का सफर अथक समर्पण, तड़के सुबह से शुरू होने वाले अभ्यास, जिम में कड़ी मेहनत, चोटों से जूझने, उनसे उबरने और निरंतर प्रयासों से होकर गुजरता है। खिलाड़ियों को खेल की तैयारियों के साथ अपनी सैन्य इकाइयों की जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करना पड़ता है।

इस दौरान उन्हें अपने परिवारों से दूर रहकर भी अनुशासन और एकाग्रता बनाए रखनी होती है। राजनाथ ने खिलाड़ियों की सफलता में प्रशिक्षकों, सहयोगी स्टाफ, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञों और उनके परिवारों के योगदान को भी सराहा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोई भी चैंपियन अकेले नहीं बनता, बल्कि उसकी सफलता के पीछे पूरी टीम का सामूहिक प्रयास होता है।

उन्होंने देश की खेल व्यवस्था को और मजबूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि लक्ष्य केवल खेलों में भागीदारी बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक खेल जगत में भारत को एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

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