Protest: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर INDIA ब्लॉक के हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च शुरू किया। इस दौरान मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। कई प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया गया। प्रदर्शन के कारण बाराखंभा रोड और मंडी हाउस सहित राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज और पोस्टर लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। विपक्षी दलों ने इन आरोपों की जांच और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रियंक खड़गे ने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 को लेकर उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ऐसे सवाल पूछ रहा है जिनका जवाब मिलना जरूरी है। प्रियंक खड़गे ने पूछा कि फॉर्म-6 को किसने अधिकृत किया और पहले से छपे फॉर्म-7 की थोक छपाई किसके निर्देश पर हुई। उन्होंने कहा कि जब किसी संवैधानिक संस्था के प्रमुख की भूमिका पर सवाल उठ रहे हों, तो जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
बीजेपी पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगत सिंह ने बीजेपी पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों ने पहले 14 फैसलों को उनकी सहमति के बिना लिए जाने की बात कही थी। उन्होंने फॉर्म-6 में संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इसके बावजूद सरकार ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है।
परगत सिंह ने कहा कि राहुल गांधी लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की बात कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठा रही है।
मार्च में ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव समेत कई नेता शामिल
INDIA ब्लॉक के इस मार्च में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा CPI और CPM के नेता भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी पहले बाराखंभा रोड चौराहे पर पहुंचे और वहां से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू किया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों को अदालत के समक्ष उठाना चाहते हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
CJI से मुलाकात की अपील
कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करेंगे, तो जनता की शिकायतों को कौन सुनेगा। उन्होंने आग्रह किया कि प्रतिनिधिमंडल को अपनी चिंताएं रखने का अवसर दिया जाए।
अखिलेश यादव बोले- बीजेपी के इशारे पर काम करता दिख रहा निर्वाचन आयोग
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग बीजेपी के इशारे पर काम करता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के फर्जी वोट अब भी बनवाए जा रहे हैं और उम्मीद जताई कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करेगा। अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापक अभियान, करोड़ों रुपये के खर्च और अधिकारियों की तैनाती के बावजूद मतदाता सूची में बड़ी संख्या में दोहरे नाम होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची की ऐसी समस्याएं दूर नहीं हुईं, तो SIR प्रक्रिया का उद्देश्य क्या था?
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने पर अड़ी हुई है और दावा किया कि आखिरकार सरकार को इस मामले में झुकना पड़ेगा।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच INDIA ब्लॉक के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। विपक्षी दलों ने कहा कि वे मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही के मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे।