Bihar: बिहार के अररिया जिले के मधुबनी गाव के ये बच्चे स्कूल से लौट रहे हैं, ये आम बात है और ऐसी तस्वीर देश के हर कोने में दिखती है। हालांकि जो बात अलग है वो ये कि ये बच्चे पास के किसी गांव या जिले से नहीं बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के स्कूल में पढ़ाई कर लौट रहे हैं और हैरानी की बात ये भी है कि ये किसी स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम का हिस्सा भी नहीं है। गांव वालों का कहना है कि उनके पास कोई खास विकल्प नहीं है। भारतीय सीमा की तरफ सबसे नज़दीकी सरकारी स्कूल ग्वारपुछरी गांव में है, लेकिन एक नदी और बेहतर सड़क न होने की वजह से बच्चों के लिए वहां तक पहुंचना मुश्किल है।
लोगों का कहना है कि यह स्थिति दशकों से बनी हुई है। मधुबनी गांव से ग्वारपुछरी की दूरी लगभग चार किलोमीटर है, लेकिन इन स्कूली बच्चों को यह दूरी बहुत ज्यादा लगती है। छात्रों का कहना है कि नेपाल में उनका स्कूल स्कॉलरशिप, यूनिफॉर्म के लिए पैसे और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं देता है। ये ऐसी सुविधाएं हैं जो शायद उनके माता-पिता के उन्हें पढ़ाई के लिए सीमा पार भेजने के फैसले में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
ग्वारपुछरी के स्कूल के प्रधानाध्यापक नेपाल सीमा के पास के गांवों के बच्चों के पड़ोसी देश के स्कूल में जाने की मजबूरी को समझते हैं। बच्चों का कहना है कि अगर उन्हें चुनने का मौका मिले, तो वे अपने ही गांव के स्कूल में जाना ज्यादा पसंद करेंगे। जब तक ऐसा नहीं होता, स्कूल की घंटी इन भारतीय बच्चों को सीमा पार बुलाती रहेगी।
जिला प्रशासन के अधिकारियों की एक टीम ने शुक्रवार को गांव का दौरा किया और लोगों से बातचीत की। हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले पर मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया।