Dussehra: पूरे देश में दशहरे का मतलब एक ही है… रावण के पुतले का दहन, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रयागराज के कटरा में दशहरा अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां रावण के पुतला जलाया नहीं जाता, बल्कि लोग रावण का स्वागत करते हैं। मान्यता है कि प्रयागराज का कटरा रावण का ननिहाल था। इसका संबंध ऋषि भारद्वाज से भी बताया जाता है। कहा जाता है कि ऋषि भारद्वाज की बेटी इडैविडा रावण की मां थीं।
सदियों पुरानी इस परंपरा को आज भी कटरा में निभाया जाता है। इसी के तहत श्री कटरा रामलीला समिति ने मंगलवार को रावण की भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में रावण को एक खास मेहमान और विद्वान के रूप में पेश किया।
कटरा रामलीला कमेटी के महासचिव उमेश केशरवानी ने बताया कि “भारद्वाज मुनि के नाती होने के कारण रामा इसलिए हम लोग शोभा यात्रा निकालते हैं और शोभा यात्रा जो निकालते हैं पूरा कटरा भ्रमण करता है और 20-25 चौकियों के साथ निकालते हैं। मंदोदरी जी चांदी की चौकी पर विराजमान रहती हैं और रावण जी राजा रावण महाराज जी हमारे हौदे के ऊपर विराजमान रहते हैं और पूरे नगर वास में भ्रमण करते हैं।”
“ये बहुत ही दिनों से ऐतिहासिक परंपरा श्री कटरा रामलीला कमेटी चली आ रही है महर्षि भारद्वाज मुनि क्षेत्र होने के नाते रावण का ननिहाल होने के नाते ये शोभा यात्रा रावण अपने पूरे श्रद्धा के साथ नगर भ्रमण में निर्धारित मार्गों में लगभग छह किलोमीटर का निर्धारित मार्ग है वहां से शोभा यात्रा निकलते हुए यहां पर पुनः समाप्त होती है। यहां पर अपनी रानियों, अपने पुत्रों, अपने भाइयों के साथ पूरी श्रद्धा के साथ रावण की शोभा यात्रा महर्षि भारद्वाज मुनि आश्रम से ही निकलती है। ये बहुत ही पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरा प्रयागराज की महर्षि भारद्वाज मुनि क्षेत्र में होने के नाते यहां पर निकलती है और रावण का ननिहाल होने के नाते यहां पर उनको सम्मान देते हुए हम लोग उनका दहन भी नहीं करते।”
शोभायात्रा में रावण के शाही परिवार की झांकी शामिल थी, जिसमें उसकी पत्नी मंदोदरी, भाई, बेटे और दरबार के दूसरे सदस्य दिखाई दिए। रावण को हाथी की सवारी करते हुए दिखाया गया। वहीं, उसके परिवार के बाकी सदस्य अलग-अलग रथों पर सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुए।
आशीष कुमार जायसवाल, कलाकार “रावण भारद्वाज मुनि का भांजा है, इसलिए रावण अपने सज्जो-सज्जा के साथ, अपने भाई-बंधुओं के साथ, अपनी पत्नी के साथ अपने नाना के घर जाता है मिलने के लिए नाना से और कटरा बाजार होते हुए पूरे शहर में भ्रमण करता है। लोगों को आशीर्वाद प्रदान करता है। प्रयागराज की यही परंपरा कटरा के दशहरे को सबसे अलग बनाती है। इस भव्य शोभा यात्रा के जरिए रावण के उस रूप को भी याद किया जाता है, जिसमें उसे एक विद्वान और दैवीय वंश से जुड़ा माना जाता है।