Prayagraj: रामलीला के इन कलाकारों के लिए, महाकाव्य के किसी किरदार को निभाना सिर्फ वेशभूषा पहनकर मंच पर आने से कहीं बढ़कर है। उनके किरदार यह भी तय करते हैं कि वे क्या खाएंगे, कैसे रहेंगे और कुछ मामलों में तो स्टेज से दूर रहने पर भी वे कैसा व्यवहार करेंगे।
उत्तर प्रदेश में संगमनगरी प्रयागराज की ऐतिहासिक कटरा रामलीला कमेटी से जुड़े कलाकार न सिर्फ मंच पर, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भी उन किरदारों को जीते हैं जिन्हें वे निभाते हैं। इसकी तैयारी वे मंच पर प्रस्तुति से हफ्तों पहले ही शुरू कर देते हैं।
उनका ये समर्पण नौ दिनों तक रामलीला मंचन के दौरान उनकी दिनचर्या पर भी लागू होता है। वे अपने खान-पान पर खास ध्यान देते हैं, क्योंकि उन्हें हर दिन मंच पर प्रस्तुति देनी होती है।
कलाकारों के लिए रामलीला के इन किरदारों को निभाने का मौका अपने साथ उनके कुछ बेहतरीन गुणों को अपनाने का अवसर भी लाता है। शारदीय नवरात्रि के दौरान रामलीला का मंचन नौ दिनों तक होगा और इसका समापन दशहरा पर होगा, जिसे पारंपरिक रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है।