AI Policy: ट्रंप के व्हाइट हाउस AI समझौते का क्या मतलब है

AI Policy: व्हाइट हाउस ने AI सुरक्षा से जुड़ा एक नया समझौता पेश किया है, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों ने हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस में मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से आयोजित बैठक में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी AI कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हुए। इनमें एलन मस्क, डारियो अमोदेई, मार्क जुकरबर्ग और सुंदर पिचाई शामिल थे। आसान शब्दों में कहें तो, सबसे शक्तिशाली AI सिस्टम बनाने वाली कंपनियों ने मुख्य रूप से स्व-नियमन यानी खुद नियम बनाने और सुरक्षा के और कड़े उपाय लागू करने पर सहमति जताई है।

इस समझौते में कंपनियों के लिए चार स्वैच्छिक कदमों पर जोर दिया गया है। पहला, कंपनियों को ये देखना होगा कि उनके AI मॉडल क्या कर सकते हैं। इसमें साइबर सुरक्षा, जैविक और रासायनिक खतरों, और कंप्यूटर सिस्टम तक अनचाही पहुंच से जुड़े जोखिम शामिल हैं। दूसरा, आंतरिक टीमों को यह जांचना होगा कि क्या वे सुरक्षा उपाय काम करते हैं।

तीसरा, कंपनियां ‘‘मजबूत आंतरिक नियंत्रण’’ लागू करेंगी, और इन नियंत्रणों की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए किसी ‘‘स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर’’ के साथ काम करेंगी।चौथा, कंपनी अपने निदेशक मंडल के भीतर एक समिति गठित करेंगी, जो आंतरिक और बाहरी ऑडिटरों की रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।

लेकिन यह AI के लिए कानूनी रूप से लागू होने वाला नियम नहीं है। ट्रंप ने इसे ‘‘नैतिक रूप से बाध्यकारी’’ बताया, जबकि समझौते में कहा गया है कि ये उपाय आगे चलकर कानून या नियम बन सकते हैं। फिलहाल, इससे न तो कोई संघीय AI नियामक बनता है और न ही कोई कानूनी जुर्माना तय होता है।मुख्य सवाल यही है: क्या तेजी से बढ़ने वाला यह उद्योग खुद को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकता है?

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