Bangladesh: प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि 2024 में बांग्लादेश फासीवाद से आजाद हुआ, उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लंबे समय तक चले शासन और शोषण से प्रभावित देश को फिर से मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार देश में सुधार, व्यवस्था बहाल करने और विकास के लिए रिकवरी, बहाली और पुनर्निर्माण की रणनीति पर काम कर रही है।
तारिक रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बांग्ला भाषा में अपना भाषण दिया। वह अपने परिवार के तीसरे सदस्य हैं, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया है। उनसे पहले उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और उनकी मां व पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर चुके हैं। तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान ने 1980 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। वहीं, उनकी मां खालिदा ज़िया ने 1993 में दुनिया भर के नेताओं के सामने अपना भाषण दिया था।
रहमान ने अपने पहले भाषण में कहा कि डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक चले शासन और शोषण के बाद 2024 में बांग्लादेश फासीवाद से मुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि देश अब इस दौर से बाहर निकलकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस में कहा कि बांग्लादेश अब जबरन गायब करने, हत्याओं, अपहरण, भ्रष्टाचार, लूटपाट और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी समस्याओं से बाहर निकल रहा है। उन्होंने कहा कि देश एक बार फिर लोकतंत्र की राह पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि फासीवादी शासन और शोषण से बुरी तरह प्रभावित बांग्लादेश को फिर से मजबूत बनाने के लिए सरकार 3-आर रणनीति पर काम कर रही है। इसमें रिकवरी (सुधार), रेस्टोरेशन (बहाली) और रिकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि फासीवादी शासन और शोषण के खिलाफ डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक आंदोलन और संघर्ष चला। इस दौरान हजारों लोगों ने बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि इन संघर्षों के बाद 2024 में बांग्लादेश फासीवाद से मुक्त हुआ।
उन्होंने कहा कि इस साल फरवरी में हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष राष्ट्रीय चुनाव में, लोगों ने देश का शासन चलाने की जिम्मेदारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को सौंपी। उन्होंने आगे कहा कि हर विवाद को बातचीत, कूटनीतिक प्रक्रियाओं और सहयोग के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। रोहिंग्या संकट पर उन्होंने कहा कि नौ साल से ज्यादा समय से बांग्लादेश म्यांमार से जबरदस्ती विस्थापित 12 लाख से ज्यादा रोहिंग्या लोगों को शरण दे रहा है। इसने हमारे संसाधनों, पर्यावरण, सुरक्षा और स्थानीय समुदायों पर भारी दबाव डाला है।
उन्होंने कहा कि रोहिंग्या संकट की शुरुआत म्यांमार से हुई है, इसलिए इसका समाधान भी वहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समस्या का सबसे सही समाधान विस्थापित रोहिंग्या लोगों की सुरक्षित और जल्द म्यांमार वापसी है। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या संकट की शुरुआत म्यांमार से हुई है, इसलिए इसका समाधान भी वहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समस्या का सबसे सही समाधान विस्थापित रोहिंग्या लोगों की सुरक्षित और जल्द म्यांमार वापसी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि विस्थापित रोहिंग्या लोगों के लिए जरूरी मानवीय मदद जारी रखी जाए। उन्होंने कहा कि यह सहायता तब तक मिलती रहनी चाहिए, जब तक रोहिंग्या लोगों की सुरक्षित रूप से म्यांमार वापसी नहीं हो जाती।