Asian Games: लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी अपने से बेहतर रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके जिससे भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम को एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में चीन के हाथों 1-3 से हार के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। भारत ने 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। तब भी भारतीय टीम को फाइनल में चीन के खिलाफ ही हार का सामना करना पड़ा था। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ही भारत की ओर से एकमात्र जीत दर्ज कर सकी।
भारत के सेमीफाइनल तक के सफर के दौरान शानदार प्रदर्शन करने वाले दुनिया के 14वें नंबर के खिलाड़ी लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके और पहले एकल मुकाबले में दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी शी यू कि के खिलाफ 16-21, 18-21 से हार गए जिससे भारत 0-1 से पिछड़ गया।
इसके बाद सात्विक और चिराग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेरिस ओलंपिक के रजत पदक विजेता और मौजूदा विश्व चैंपियन लियांग वेई केंग और वांग चांग की जोड़ी को 21-11, 22-20 से हराया। पहले युगल मुकाबले में मिली इस जीत से भारत ने पांच मैच के इस मुकाबले में वापसी की और इचिनोमिया सिटी म्यूनिसिपल जिम्नेजियम में सेमीफाइनल को 1-1 से बराबर कर दिया।
भारत की उम्मीदें युवा आयुष शेट्टी पर टिकी थीं लेकिन दुनिया के 20वें नंबर के इस खिलाड़ी को दुनिया के 12वें नंबर के ली शी फेंग के खिलाफ दूसरे एकल मैच में 19-21, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा जिससे भारत 1-2 से पीछे हो गया। इसके बाद भारत को मुकाबले में बनाए रखने की जिम्मेदारी हरिहरन अम्साकरुणन और एमआर अर्जुन की पुरुष युगल जोड़ी पर थी जिन्हें हे जी टिंग और लियू यी की जोड़ी से भिड़ना था। दुनिया की 25वें नंबर की भारतीय जोड़ी को कड़ी चुनौती पेश करने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा।
चेन बोयांग के अचानक बीमार पड़ने के बाद अंतिम समय में टीम में शामिल किए गए जी टिंग और लियू ने भारतीय जोड़ी को 21-16, 17-21, 21-9 से हराकर चीन को मुकाबले में जीत दिलाई और फाइनल में जगह पक्की की। हालांकि भारतीय पुरुष टीम के लिए यह एक सराहनीय परिणाम रहा क्योंकि उसने 40 साल में पहली बार लगातार दो एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा का पदक जीता है। इससे पहले भारत ने 1982 और 1986 के एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया था।