EPFO: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दे दी। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में इस फैसले की जानकारी दी। सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। फिलहाल 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक वेतन पाने वाला नया कर्मचारी EPF व्यवस्था के तहत स्वतः शामिल नहीं होता है और अनिवार्य भविष्य निधि, पेंशन तथा इससे जुड़ी बीमा सुरक्षा के दायरे से बाहर रह सकता है।
अब वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये किए जाने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये प्रति माह वेतन पाने वाले कर्मचारी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आएंगे। इस फैसले से कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा तक पहुंच मिलेगी। यह लाभ संबंधित योजनाओं के लागू प्रावधानों के अधीन होगा।
EPFO की वेतन सीमा में इससे पहले सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था, जब इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। इससे पहले 2004 से 2014 के बीच यह सीमा अपरिवर्तित रही थी। सरकार के अनुसार, मौजूदा संशोधन इस अवधि के दौरान वेतन में लगातार वृद्धि, आय में बढ़ोतरी और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
वेतन सीमा बढ़ाने के बाद सरकार पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है, जबकि मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से रोजगार के और अधिक औपचारिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति सुरक्षा मजबूत होगी और कर्मचारियों को पोर्टेबल वैधानिक सामाजिक सुरक्षा लाभों तक व्यापक पहुंच मिलेगी।
EPFO वर्तमान में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) का संचालन करता है। सरकार द्वारा उद्धृत नवीनतम EPFO आंकड़ों के अनुसार, संगठन के तहत करीब 7.98 करोड़ योगदान देने वाले सदस्य हैं और लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठान इसमें योगदान कर रहे हैं। वहीं, EPS के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन लाभ मिल रहा है। अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO मंत्रिमंडल के फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करेंगे।