BRICS Summit: भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अब सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का आगमन हो चुका है। सारे विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बैठक में शामिल होने के लिए भारत मंडपम पहुंचने के साथ ही पीएम मोदी बैठक का संबोधन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वार्षिक अध्यक्षता में बदलाव के बावजूद ब्रिक्स के फैसलों और पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ‘ट्रोइका’ व्यवस्था और एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी पर आधारित मजबूत कार्यान्वयन तंत्र जरूरी है। इस डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से फैसलों, नोडल अधिकारियों और तय समयसीमा पर नजर रखी जा सकेगी।
नई दिल्ली में भारत की 2026 की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि समूह के तीसरे दशक में प्रवेश करने और अगले 20 वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने के बीच संस्थागत निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रभावी फॉलो-अप व्यवस्था बेहद जरूरी है। पीएम मोदी ने कहा, “हमें अगले 20 वर्षों के लिए एक नया और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत है। इसकी शुरुआत हमें अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली से करनी चाहिए। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे हमारी संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मैं ब्रिक्स निरंतरता और क्रियान्वयन तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखता हूं।”
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ‘ट्रोइका’ प्रणाली के माध्यम से विभिन्न पहलों और उनके परिणामों की निरंतर निगरानी की जा सकेगी। पीएम मोदी ने कहा, “इससे ‘ट्रोइका’ व्यवस्था के जरिए सभी पहलों और परिणामों का फॉलो-अप संभव होगा। हम एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी भी बना सकते हैं, जिसमें हर फैसले से जुड़े नोडल बिंदु, समयसीमा और क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज की जाए।”
‘ट्रोइका’ व्यवस्था क्या है?
‘ट्रोइका’ शब्द का इस्तेमाल दो अलग-अलग संदर्भों में किया जाता है—एक संस्थागत और दूसरा भू-राजनीतिक।
संस्थागत व्यवस्था-
ब्रिक्स में ट्रोइका व्यवस्था अध्यक्षता के सुचारु हस्तांतरण को सुनिश्चित करने का एक तंत्र है। ब्रिक्स का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है और इसकी अध्यक्षता हर साल सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। इस व्यवस्था के तहत पिछली अध्यक्षता वाला देश, वर्तमान अध्यक्ष देश और अगली अध्यक्षता संभालने वाला देश आपसी समन्वय से काम करते हैं। इसका उद्देश्य नीतिगत निरंतरता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि दीर्घकालिक फैसलों, व्यापार पहलों तथा विस्तार से जुड़ी प्रक्रियाओं की गति अध्यक्षता बदलने के साथ प्रभावित न हो।
वैश्विक संस्थानों में सुधार की वकालत-
पीएम मोदी ने वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों में समयबद्ध सुधारों की भी मांग की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। साथ ही उन्होंने वित्तीय संस्थानों में मतदान अधिकारों को मौजूदा वैश्विक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई।
उन्होंने वैश्विक शासन के भविष्य के लिए तीन स्तंभों—प्रतिनिधित्व (Representation), जवाबदेही/उत्तरदायित्व (Responsiveness) और नियम-निर्माण (Rule-making)—पर आधारित ढांचे का प्रस्ताव रखा।
पीएम मोदी ने कहा, “इस रोडमैप को तैयार करते समय हमें तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए—प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण। प्रतिनिधित्व के संदर्भ में मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस मुद्दे पर बातचीत को निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ना होगा।”
उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों में मतदान शक्ति, नेतृत्व पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को आगे बढ़ा रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन की दिशा तय करने में उचित भूमिका मिलनी चाहिए।
‘ग्लोबल साउथ’ को निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान देने की मांग-
पीएम मोदी ने कहा कि विकासशील देशों को अब भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है। उन्होंने वैश्विक बहुपक्षीय व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए ब्रिक्स देशों से मौजूदा असमानताओं को दूर करने का आह्वान किया। उन्होंने विकासशील देशों के सामने मौजूद प्रणालीगत असंतुलन का उल्लेख करते हुए अगले शिखर सम्मेलन तक वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 सूत्रीय रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा।
पीएम मोदी ने कहा, “आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पीछे है। हमें ‘विशेषाधिकार की पिरामिड’ व्यवस्था को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा—जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और मानवता का विकास हर प्रयास के केंद्र में हो।”
उन्होंने वैश्विक संस्थागत शक्ति संरचना की भी आलोचना की और कहा कि मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था एक कठोर पिरामिड जैसी है, जिसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि इससे प्रभावित देश निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका नहीं निभा पाते। पीएम मोदी ने कहा कि केवल ब्रिक्स का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि सदस्य देशों को वैश्विक स्तर पर व्यापक संरचनात्मक सुधारों के लिए भी प्रयास करना चाहिए।
ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए देशों का आभार-
प्रधानमंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन के लिए सभी भागीदार देशों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ समूह के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव है। पीएम मोदी ने कहा, “भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस वर्ष का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक होती है।”
भारत ने 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है और नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। समूह अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर चुका है। सम्मेलन में रणनीतिक महत्व वाले विभिन्न क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग मजबूत करने और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान सतत विकास, आर्थिक वृद्धि, प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई और विकासशील देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है।
ब्रिक्स देशों में संयुक्त बयान पर सहमति-
एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम में ब्रिक्स देशों ने गहन वार्ता के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बना ली है। यह बातचीत शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक जारी रही। वार्ता के दौरान कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद सामने आए, लेकिन भारत ने लगातार consultations के जरिए विभिन्न पक्षों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक ही मंच पर होने के कारण यह सहमति विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों के बीच क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग रुख के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति बनाना एक जटिल कूटनीतिक चुनौती थी। भारत के कूटनीतिक प्रयासों से इन मतभेदों को ब्रिक्स प्रक्रिया पर हावी होने से रोका गया और सदस्य देशों के बीच आम सहमति कायम करने में सफलता मिली।
वैश्विक आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच ब्रिक्स-
ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीति के समन्वय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यह वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के साझा रुख को आकार देने का प्रमुख मंच है। लगातार संवाद के माध्यम से ब्रिक्स बहुपक्षीय संस्थानों में ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने का माध्यम बना है। इसका एजेंडा विकास, वित्त, प्रौद्योगिकी, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और आकांक्षाओं को दर्शाता है। यह सदस्य देशों को अनुभव साझा करने और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के लिए भारत मंडपम पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सभी ब्रिक्स प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” है। यह थीम उपलब्धियों को मजबूत करने और संस्थागत प्रभावशीलता बढ़ाने पर भारत के जोर को दर्शाती है। इसमें विकास, स्थिरता और नवाचार को एजेंडे के केंद्र में रखा गया है और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी प्रमुखता दी गई है। भारत ब्रिक्स को एक रचनात्मक और समाधान-उन्मुख मंच के रूप में और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।