BRICS Summit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। यह पिछले सात वर्ष में उनकी पहली भारत यात्रा है और इस यात्रा से दोनों देशों के समग्र द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी शी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शी की अगवानी की। इस दौरान सांस्कृतिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर उनका स्वागत किया।
यात्रा से जुड़े घटनाक्रम से परिचित अधिकारियों ने बताया कि शी की यह यात्रा पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण अत्यंत तनावपूर्ण हुए भारत-चीन संबंधों को और सामान्य बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। शी की इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच हाल में कई उच्चस्तरीय वार्ताएं हुई हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधि वार्ता भी शामिल है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन के आक्रामक सैन्य रुख को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
चीन के राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है जिसमें सरकारी अधिकारी और प्रमुख कारोबारी शामिल हैं। पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से अधिक समय तक रहे सैन्य गतिरोध के कारण बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए दोनों देशों ने विश्वास बहाली के मकसद से पिछले एक वर्ष में कई कदम उठाए हैं। इन मामलों से अवगत अधिकारियों ने बताया कि मोदी और शी के बीच वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर समग्र स्थिति की समीक्षा किए जाने और व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार समेत द्विपक्षीय संबंधों को और सामान्य बनाने के उपाय तलाशे जाने की उम्मीद है।
दोनों नेताओं के बीच बैठक शाम छह बजे निर्धारित है। मोदी और शी ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर व्यापक मुद्दों पर वार्ता की थी। दोनों देशों ने 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़पों के बाद अत्यंत तनावपूर्ण हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई कदम उठाए हैं।
डोभाल ने पिछले महीने के अंत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि (एसआर) स्तर की वार्ता की थी। इसमें सीमांकन, सीमा पार सहयोग से जुड़े कार्यों को जारी रखने और एलएसी पर शांति बनाए रखने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई थी। डोभाल और वांग दोनों सीमा वार्ता तंत्र के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि हैं। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद का व्यापक समाधान तलाशने के लिए यह तंत्र 2003 में स्थापित किया गया था।