UP News: जेवर की जमीं पर जापानी मेहमानों का जोरदार स्वागत, भारत-जापान रिश्तों में नए अध्याय का आरंभ

UP News:  जेवर की धरती भारत-जापान की सदियों पुरानी मित्रता और आधुनिक औद्योगिक साझेदारी के एक नए अध्याय की साक्षी बनी। जापान की प्रतिष्ठित कंपनी कुबोटा के प्रतिनिधियों के जेवर पहुंचने पर भारतीय परंपरा और आत्मीयता के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। जेवर की छात्राओं ने भारत और जापान के राष्ट्रीय ध्वज हाथों में लेकर जापानी अतिथियों का अभिनंदन किया।

विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रस्तावित औद्योगिक इकाई का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी गई। इस अवसर पर कुबोटा के प्रेसिडेंट एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिन्जो हनाडा, एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल नंदा और जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, जापानी प्रतिनिधि, क्षेत्र के किसान एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल उद्योग, निवेश और व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों में हैं। भगवान गौतम बुद्ध का दया, करुणा, शांति और मानवता का संदेश भारत की धरती से जापान तक पहुंचा। यह इस बात का परिचायक है कि दया और करुणा के मूल्यों पर आधारित हिंदुस्तान की संस्कृति दुनिया की सर्वोत्कृष्ट संस्कृतियों में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। आज उसी प्राचीन आध्यात्मिक रिश्ते को आधुनिक तकनीक, उद्योग और विकास की नई शक्ति मिल रही है। जापान की तकनीक, जेवर के किसानों की धरती और उत्तर प्रदेश के विकास का संकल्प मिलकर रोजगार और समृद्धि के नए अवसर पैदा करेंगे। जेवर की धरती से भारत-जापान संबंधों के एक नए अध्याय का आरंभ हो रहा है।

कार्यक्रम का भावनात्मक क्षण उस समय देखने को मिला, जब जिन किसान परिवारों की जमीन पर कुबोटा का औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित हो रहा है, उन्हीं परिवारों की कृषक महिलाओं और किसानों ने जापानी मित्रों को भारत-जापान मैत्री का संदेश समर्पित एक विशेष स्मृति-चिह्न भेंट किया।
विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि जेवर के विकास की इस यात्रा के वास्तविक भागीदार हमारे किसान हैं। उन्होंने अपनी भूमि देकर केवल एक उद्योग के लिए स्थान उपलब्ध नहीं कराया, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के रोजगार और आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की नींव रखी है। किसान परिवारों द्वारा जापानी मित्रों को दिया गया मैत्री संदेश हमारी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को अभिव्यक्त करता है।

जापानी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में छात्राओं, किसानों और महिलाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को भारत-जापान की सांस्कृतिक निकटता का स्वरूप प्रदान किया। एक ओर जापान की आधुनिक तकनीक और औद्योगिक क्षमता थी, तो दूसरी ओर जेवर की मिट्टी, किसानों का योगदान और भारतीय संस्कृति का आत्मीय आतिथ्य।

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