Neelakurinji: अभी तक नीले रंग का हल्का सा आभास होता था। अब केरल में इडुक्की की बाइसन घाटी में चोकरामुडी की धुंध से ढकी ढलानों पर नीलकुरिंजी के छोटे-छोटे समूह दिखने लगे हैं। नीले रंग के ये फूल 12 साल में एक बार खिलते हैं। चेम्मनार गैप रोड के आसपास इन फूलों की बहार देखने को मिलती है। कोच्चि-धनुष्कोडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर गैप रोड से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर फूलों से भरे इलाके दिखने लगते हैं।
भारी बारिश के बावजूद फूलों की कलियां सही-सलामत हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आने वाले हफ़्तों में ढलानों पर नीले फूलों की खूबसूरत चादर बिछ जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “कुछ इलाकों में नीलकुरिंजी के फूल भारी संख्या में खिलते हैं। इस इलाके में पिछली बार नीलकुरिंजी के फूल करीब 12 साल पहले खिले थे। अभी इनमें फूल आना शुरू हुआ है। अब तक बारिश का इन पर कोई असर नहीं पड़ा है। अगले दो हफ्तों में नीलकुरिंजी के फूल पूरी तरह खिल जाएंगे। उसके बाद अगर बारिश होती है, तभी फूलों को नुकसान हो सकता है। 12 साल पहले जब नीलकुरिंजी के फूल खिले थे, तब भी बारिश हुई थी, लेकिन उससे फूलों पर कोई असर नहीं पड़ा था। इन छोटी पहाड़ियों और पहाड़ों समेत पूरा इलाका नीलकुरिंजी के फूलों से ढंक गया था।”))
पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले नीलकुरिंजी फूल 12 साल में एक बार खिलने के दुर्लभ चक्र के लिए मशहूर हैं। इस इलाके में पिछली बार ये फूल 2014 में खिले थे। अब, जब ये फूल पहाड़ियों की ढलानों पर फैल रहे हैं, तो चोक्रामुडी एक बार फिर नीले रंग की चादर में रंगने को तैयार है।