Khadi: हाथ से काते गए खादी के कपड़े के टुकड़ों से लेकर देश भर में भेजे जाने वाले तिरंगे झंडों तक, भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सफर अक्सर महाराष्ट्र के नांदेड़ से ही शुरू होता है। सरकारी संस्थानों और सामुदायिक कार्यक्रमों में फहराए जाने वाले इनमें से कई राष्ट्रीय झंडे इसी जिले के खादी ग्रामोद्योग भवन में सिले और छापे जाते हैं।
इस केंद्र में साल भर 100 से ज्यादा कारीगर काम करते हैं और अलग-अलग आकार के तिरंगे झंडे बड़ी सावधानी से तैयार करते हैं। नांदेड़ केंद्र भारत के उन चुनिंदा अधिकृत झंडा-निर्माण केंद्रों में से एक है, जो ‘फ्लैग कोड’ के नियमों के अनुसार उदगीर से लाए गए खादी के कपड़े को तिरंगे में बदलते हैं।
दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार ने फ्लैड कोड यानी भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया था। इस संशोधन के जरिए राष्ट्रीय ध्वज को हाथ से बने होने के साथ-साथ मशीन से निर्मित और पॉलिएस्टर सहित सूती, ऊनी, रेशमी और खादी के कपड़ों से बनाने की अनुमति दी गई।
खादी के झंडों की तुलना में गैर-खादी और मशीन से बने झंडे सस्ते हो गए हैं। सरकार द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद पॉलिएस्टर और अन्य कपड़ों के झंडे बाजार में आ गए हैं। इससे पारंपरिक खादी बनाने वाले लोगों और संगठनों के कारोबार पर असर पड़ा है। पूरा भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में नांदेड़ में बने खादी के झंडे देश भर की यात्रा करेंगे और अपने साथ कारीगरी और राष्ट्रीय गौरव की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।