Shimla: हिमाचल प्रदेश में रहने वाले तिब्बतियों ने तिब्बत की भाषा, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा की मांग को लेकर 24 घंटे की भूख हड़ताल की। इसका आयोजन ‘रीजनल तिब्बती महिला संघ’ की अगुवाई में किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने चीन के तथाकथित “एथनिक यूनिटी एंड प्रमोशन लॉ” (जातीय एकता और प्रोत्साहन कानून) को रद्द करने और तिब्बती भाषा, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा की मांग की।
आयोजकों ने बताया कि ये विरोध प्रदर्शन 2 जुलाई को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बती लोबगा रंगजेन (लोबसांग पाल्डेन) द्वारा आत्मदाह किए जाने की घटना की याद में और तिब्बती मुद्दे पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में 20 अगस्त को शिमला में कैंडललाइट मार्च और रैली निकाली जाएगी, जब इस अभियान को 49 दिन पूरे हो जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता करण नंदा ने शिमला में चल रही भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि तिब्बत का मुद्दा सिर्फ भू-राजनैतिक मामला नहीं है, बल्कि ये भाषा, संस्कृति, धर्म और पहचान से जुड़ा सवाल है।