Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के आर्थिक नतीजों पर काफी चर्चा हो रही है लेकिन अब तक, जहाजों की लंबी नाकाबंदी के कारण होने वाले पारिस्थितिक नुकसान के जोखिम को नजरअंदाज किया गया है। हालिया शोध से पता चलता है कि फारस/अरब की खाड़ी में फरवरी से खड़े 1,500 से अधिक व्यावसायिक जहाज पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं क्योंकि उनके निचले हिस्सों (हल्स) पर समुद्री बायोफाउलिंग प्रजातियां जमा हो रही हैं।
जैसे ही जलडमरूमध्य फिर से खुलता है, ये जहाज उन बंदरगाहों तक इन जीवों को फैला सकते हैं जहां वे जाने वाले हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव सुरक्षा से जुड़ी “सुपर-स्प्रेडर” घटना हो सकती है। बाहरी समुद्री पौधों, जानवरों, परजीवियों और बीमारियों का इस तरह का प्रवेश स्थानीय इकोसिस्टम और जंगली मछलियों के साथ-साथ एक्वाकल्चर स्टॉक और तटीय उद्योगों को भी प्रभावित करता है। इनसे पर्यावरण को भारी नुकसान और आर्थिक हानि हो सकती है।
लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का मामला ऐसा पहला उदाहरण नहीं है, जब शिपिंग में रुकावट के कारण बेकार खड़े जहाजों पर बड़े पैमाने पर ‘बायोफाउलिंग’ (समुद्री जीवों का जमाव) हुई हो।
परिवहन में रुकावटें ————————–
सामान की ढुलाई के लिए दुनिया भर में व्यापारी जहाजों का आवागमन परिवहन का मुख्य जरिया है और शोधकर्ताओं ने समुद्री व्यापार में 24 ऐसे अहम बिंदुओं (चोक पॉइंट्स) की पहचान की है। लेकिन इनमें से 20 के लिए वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं, यानी जहाजों का रास्ता बदलकर परिवहन का काम जारी रखा जा सकता है। इसमें ज्यादा वक्त और खर्च लग सकता है, लेकिन इससे जहाजों को बड़े पैमाने पर बेकार खड़ा रखने की नौबत नहीं आएगी।
सिर्फ चार ऐसे चोक पॉइंट हैं जिनका कोई दूसरा रास्ता नहीं है, इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य, बाल्टिक सागर में ओरेसुंड जलडमरूमध्य, काला सागर से निकलने वाले बोस्पोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य, और बोहाई सागर में बोहाई जलडमरूमध्य शामिल हैं।
चोक पॉइंट्स (अहम समुद्री रास्तों) पर रुकावटें कई वजहों से आ सकती हैं, मसलन टकराव और युद्ध (होर्मुज जलडमरूमध्य, स्वेज नहर), आतंकवाद और समुद्री डकैती (लाल सागर में बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य, मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच मलक्का जलडमरूमध्य), समुद्री दुर्घटनाएं (स्वेज नहर, 2021) और सूखा पड़ने जैसे पर्यावरणीय असर (2019 और 2023 में पनामा नहर)। लेकिन रुकावटें जान-बूझकर भी पैदा की जा सकती हैं। किसी भी समय दुनिया भर के व्यावसायिक जहाजों के बेड़े का लगभग एक फीसदी हिस्सा जान-बूझकर सेवा से हटा दिया जाता है, क्योंकि आर्थिक कारणों, बाजार में जरूरत से ज्यादा आपूर्ति, मौसम के हिसाब से बाजार में बदलाव या रखरखाव और अपग्रेड की जरूरत की वजह से जहाजों को सेवा से हटाना पड़ता है।
साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट जैसी आर्थिक मंदी के कारण, दुनिया भर में आयात और निर्यात में भारी गिरावट आई, जिससे बड़ी संख्या में जहाजों को काम से हटाना पड़ा। हजारों जहाज– जो दुनिया के कुल कंटेनर जहाजों का लगभग 10 फीसदी और रेफ्रिजरेटेड जहाजों का 25 फीसदी थे– या तो लंगर डालकर बेकार खड़े थे या उन्हें सेवा से हटा दिया गया था। 1970 के दशक में आए तेल संकट के कारण दुनिया भर में 466 टैंकर बेकार हो गए थे।
मछली पकड़ने वाले बड़े बेड़ों को नियमों के तहत मछली पकड़ने पर रोक और मौसम की वजह से लगी पाबंदियों के कारण हर साल कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ता है। उदाहरण के लिए दक्षिण चीन सागर में मई और अगस्त के बीच संरक्षण के मकसद से मछली पकड़ने पर रोक के कारण हर साल हज़ारों जहाजों को काम रोकना पड़ता है।
इसी तरह, उत्तरी प्रशांत और बेरिंग सागर में मछली पकड़ने वाले बेड़े सीमित मौसमी समय-सीमा में काम करते हैं और ऑफ-सीजन के दौरान ज्यादा भीड़-भाड़ वाले कुछ बंदरगाहों पर रहते हैं।
न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के लिए खतरे
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एक जगह पर रुके हुए जहाजों पर कम समय में ही बड़ी मात्रा में ‘बायोफाउलिंग’ (समुद्री जीवों का जमाव) हो सकता है, खासकर उष्णकटिबंधीय इलाकों के पानी में।
जब ये जहाज बाद में उन जगहों से निकलते हैं, तो वे उन जीवों को नई जगहों पर ले जाते हैं, जिससे वहां कोई नया बाहरी जानवर या पौधे का कीट, परजीवी या बीमारी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।
फारस/अरब की खाड़ी में 50 से ज्यादा ऐसी समुद्री प्रजातियां पाई जाती हैं, जो मूलतः वहां की नहीं हैं, और इस क्षेत्र की कई मूल प्रजातियों को दुनिया भर में ले जाया जा चुका है।
हालांकि दोबारा खुलने के बाद पहले महीने में होर्मुज जलडमरूमध्य में और उसके आस-पास फंसे बहुत सारे जहाजों के न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया पहुंचने की संभावना नहीं है, लेकिन शोध से पता चलता है कि एक साल के भीतर ऐसे कई जहाज आएंगे जो संभावित रूप से आक्रामक प्रजातियों को भी साथ लाएंगे।
न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ही देशों में जैव सुरक्षा के लिए बेहतर नियम और मजबूत नियामक प्रणाली मौजूद हैं। इसमें शुरुआती पहचान और तेजी से कार्रवाई करने की क्षमताएं शामिल हैं, अगर बायोफाउलिंग के जोखिम वाले जहाजों की पहचान की जाती है।
उदाहरण के तौर पर कोविड महामारी के दौरान जब क्रूज जहाजों को रोककर रखा गया था, तब न्यूजीलैंड जैव सुरक्षा के मद्देनजर उनकी जांच करने और जरूरी कदम उठाने में कामयाब रहा था। प्रभावित जहाजों को न्यूजीलैंड के समुद्री इलाके से बाहर जाना पड़ा था या फिर ये पक्का करने के लिए मेंटेनेंस करना पड़ा कि उनके निचले हिस्से (हल्स) और खास जगहों (जैसे प्रोपेलर और रडर) की सफाई जैव सुरक्षा के तय मानकों के मुताबिक थे।
हालांकि कम समय के लिए आने वाले व्यावसायिक जहाजों पर बायोफाउलिंग का प्रबंधन करना एक चुनौती बनी हुई है। हम होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से आने वाले जहाजों के लिए बायोफाउलिंग के जोखिम को प्रबंधित करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने की सलाह देते हैं।
— रवाना होने से पहले बायोफाउलिंग के स्तर का अंदाजा लगाने के लिए जांच करना। इस काम में मदद के लिए इस इलाके में कई सेवाएं मौजूद हैं। जहाजों के पास ‘पर्यावरणीय डीएनए नमूने का इस्तेमाल जैव सुरक्षा के खतरे के स्तर का पता लगाने में मदद कर सकता है।
— जब संभव हो फारस/अरब खाड़ी क्षेत्र से प्रस्थान करने से पहले जल में सफाई करें। हालांकि, इससे जहाज पर जमा जैविक गंदगी और कोटिंग के मलबे को साफ किया जाना चाहिए, न कि पर्यावरण को नए जीवों और प्रदूषकों के संपर्क में लाना चाहिए।
जितनी जल्दी हो सके सुरक्षित और प्रभावी सफाई करने से जैविक आक्रमण के खतरे कम होंगे।
— जहाज के तय रास्ते का अनुमान लगाना, खासकर खाड़ी से निकलने के बाद पहले बंदरगाह की पहचान करना और जैव सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का आकलन करने के लिए बंदरगाह और राष्ट्रीय अधिकारियों से बातचीत करना।
— जहाजों को लेने वाले राष्ट्रीय अधिकारियों और बंदरगाहों को पर्यावरण डीएनए या कम लागत वाले, तेजी से आकलन करने वाले तरीकों का इस्तेमाल करके शुरुआती पहचान और तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था लागू करनी चाहिए ताकि नए घुसपैठ के मामलों की पहचान इतनी जल्दी हो सके कि उन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
— अधिकारियों को जैव सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की जानकारी साझा करने के लिए तेजी से अलर्ट भेजने और सूचना फैलाने वाले नेटवर्क बनाने चाहिए।
संभावित सुपर-स्प्रेडर घटना और ऐसी ही अन्य घटनाओं के असर को कम करने के लिए वैश्विक सहयोग और कार्रवाई की जरूरत है ताकि समुद्री जैविक आक्रमणों और उनके प्रभावों से हमारे पर्यावरण, अर्थव्यवस्थाओं और सामाजिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।