PoK Protest: संयुक्त राष्ट्र का POK में प्रदर्शन पर बड़ा बयान, कहा- कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय हो

PoK Protest: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।

महासचिव के उप-प्रवक्ता फरहान हक ने कहा, ‘‘महासचिव अपने उच्चायुक्त के काम का समर्थन करते हैं और हमें वास्तव में उम्मीद है कि तुर्क (संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क) की अपीलों पर ध्यान दिया जाएगा।’’ उन्होंने पीओके की स्थिति और वहां हाल के घटनाक्रम को लेकर महासचिव के रुख के बारे में पीटीआई वीडियो के एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पिछले महीने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष व गहन जांच कराए जाने और पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।’’

पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की। बयान में विशेष रूप से कहा गया था कि 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव से पहले जून से अब तक कई लोगों के मारे जाने की खबर है।

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था। संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं।

सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है। बयान में कहा गया था, ‘‘हम अधिकारियों से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।’’ इसमें कहा गया था कि मानवाधिकार उच्चायुक्त ने स्थानीय लोगों की मूल समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद का भी आह्वान किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *