Sant Sansad 2026: लंदन में NETWORK 10 की ‘संत संसद’ का भव्य मंच, सनातन संस्कृति से राष्ट्रचेतना तक

Sant Sansad 2026: साल 2012 से लगातार प्रसारित समाचार चैनल ‘नेटवर्क 10’ अपनी टैगलाइन ‘एक दर्पण’ की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सामाजिक समरसता को प्रमुखता से मंच दे रहा है। चैनल का विचारशील आयोजन ‘संत संसद’ सांस्कृतिक संवाद, सामाजिक मार्गदर्शन और राष्ट्रीय अखंडता पर गंभीर विमर्श का सशक्त माध्यम बन चुका है। “विकास भी, विरासत भी” के मूल मंत्र से प्रेरणा लेकर नेटवर्क 10 अब तक पांच सफल ‘संत संसद’ आयोजनों का संचालन कर चुका है।

अब तक पाँच ‘संत संसद’ का सफल आयोजन-

पहला आयोजन 12 जनवरी 2024 को अयोध्या में सरयू तट पर ‘श्री राम कृपा से समृद्धि’ विषय पर हुआ, राम नगरी अयोध्या में सरयू तट पर “ संत संसद -श्री राम कृपा से समृद्धि “ प्रथम कार्यक्रम का आयोजन “NETWORK 10“ द्वारा सफलता पूर्वक किया गया , जो कि काफी सराहा भी गया।

इसके बाद दूसरा आयोजन 23 दिसंबर 2024 को नोएडा में और तीसरा आयोजन 10 जनवरी 2025 को मुंबई में ‘संत संसद और कुंभ का आगाज’ विषय के साथ संपन्न हुआ। 29 मार्च 2026 को जयपुर में आयोजित चौथी संत संसद में लगभग 150 संतों ने ‘जातिवादी नहीं, राष्ट्रवादी – हम सब एक हैं’ के संदेश के साथ भागीदारी की।

संत संसद के विचार विषय “जातिवादी नहीं, राष्ट्रवादी – हम सब एक हैं” को विस्तार देते हुए 16 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पांचवीं संत संसद के दौरान पूज्य संतों ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। यह केवल एक भ्रमण नहीं था, बल्कि एक ‘राष्ट्र भक्ति की तीर्थयात्रा’ थी, साथ ही पंचम संत संसद का आयोजन सम्पन्न हुआ।

पाँच सफल आयोजनों के बाद, राष्ट्रवाद और सनातन संस्कृति के इस पावन विचार को वैश्विक विस्तार देने के लिए “NETWORK 10“ द्वारा छठी ‘संत संसद’ का आयोजन 7 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक ब्रिटेन (लंदन) की ऐतिहासिक धरती पर किया जा रहा है। यह मंच केवल एक संवाद नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा और ‘सॉफ्ट पावर’ को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करने का एक अभिनव प्रयास है। इस ‘संत संसद’ का मूल मंत्र है- ‘जातिवादी नहीं, राष्ट्रवादी हम सब एक हैं’ । हमारा सनातन धर्म कभी बांटने की बात नहीं करता, वह जोड़ने की बात करता है। जब हम अपनी जातिगत और क्षेत्रीय पहचान से ऊपर उठकर केवल राष्ट्रवाद को सर्वोपरि मानते हैं, तभी एक सशक्त समाज का निर्माण होता है।

विश्व भर में फैले करोड़ों अप्रवासी भारतीय न केवल भारत के आर्थिक विकास के भागीदार हैं, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के ‘राष्ट्रदूत’ भी हैं। पाँच संत संसद के सफल आयोजनों के बाद, राष्ट्रवाद और सनातन संस्कृति के इस पवित्र विचार को वैश्विक विस्तार देने के लिए लंदन की ऐतिहासिक धरती पर “NETWORK 10“ द्वारा आयोजित यह मंच केवल एक संवाद नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को वैश्विक पटल पर उकेरने का एक अभिनव प्रयास है।

 

 

 

 

 

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