Akanksha Chamola: एक्टर आकांक्षा चमोला का कहना है कि भले ही नेटफ्लिक्स के शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ में उनका सफर फिनाले से पहले ही खत्म हो गया हो, लेकिन वो इस अनुभव को अपनी निजी जीत मानती हैं। उन्हें दर्शकों का प्यार और सपोर्ट मिला और साथ ही उन्हें अपनी नई खूबियों का भी पता चला। शो के ‘रिडेम्पशन डे’ एपिसोड में वरुण यादव (लैला) के साथ आकांक्षा चमोला को भी शो से बाहर कर दिया गया। इसके बाद राम कपूर, शिल्पा शिंदे, श्रेया कालरा, शिवांगी जोशी और योगेश रावत टॉप पांच फाइनलिस्ट बने।
अपने 35 दिन के सफर को याद करते हुए आकांक्षा चमोला ने इस रियलिटी शो को अपने करियर के सबसे मुश्किल लेकिन फायदेमंद अनुभवों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “ये एक बहुत दिलचस्प सफर था। मैंने इसका बहुत मजा लिया। मैंने पहले कभी ऐसा रियलिटी शो नहीं किया था जिसमें कंटेस्टेंट्स को एक जगह बंद रहना पड़ता है, इसलिए ये मेरा पहला अनुभव था। मैंने बहुत कुछ सीखा और कई बातें समझीं। कुल मिलाकर, ये बहुत मजेदार और यादगार अनुभव था।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस शो ने उनकी पर्सनैलिटी का कोई बिल्कुल नया पहलू दिखाया है? इस पर अभिनेत्री ने कहा कि इस अनुभव ने उनकी पर्सनैलिटी को बदला नहीं, बल्कि उनमें पहले से मौजूद खूबियों को बाहर लाया। आकांक्षा चमोला ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैंने अपनी पर्सनैलिटी का कोई बिल्कुल नया पहलू खोजा है। मुझे पहले से पता था कि ये खूबियां मुझमें हैं। हालात ने बस मेरी पर्सनैलिटी के अलग-अलग पहलुओं को सबके सामने ला दिया।”
टॉप सात में जगह बनाने वाली आकांक्षा चमोला ने कहा कि उन्हें कभी नहीं लगा कि बिना किसी स्वार्थ के किसी की मदद करना और पॉजिटिविटी कमजोरी हैं, भले ही उन्होंने बार-बार सुना हो कि रियलिटी टेलीविजन में दया के बजाय आक्रामकता को बढ़ावा दिया जाता है। उन्होंने कहा, “मेरा मतलब कभी ये नहीं था कि रियलिटी शो में पॉजिटिविटी की कोई जगह नहीं है। लोग सोचते हैं कि दयालु, संवेदनशील या अच्छा होना कमजोरी है, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूं। ऐसे पल भी आए जब मैंने मानसिक रूप से हार मान ली थी क्योंकि हम शारीरिक रूप से थक चुके थे और हमें सही खाना नहीं मिल रहा था। लेकिन अगर गेम में पॉजिटिविटी की कोई जगह नहीं होती, तो मैं पहले ही हफ्ते में बाहर हो जाती।”
उन्होंने कहा कि शो का मुख्य विषय “अपनी सच्चाई को अपनाना” था, जिसने उन्हें जो वो वाकई हैं वो बने रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मैं जैसी हूं, वैसी ही रही। मैंने शो के लिए खुद को नहीं बदला।” इस आलोचना का जवाब देते हुए कि वो सबसे कमजोर कंटेस्टेंट में से एक थीं, आकांक्षा चमोला ने कहा कि घर के बाहर एपिसोड देखने के बाद उनकी सोच बदल गई।
उन्होंने कहा, “जब आप अंदर होते हैं, तो आपके पास पूरी तस्वीर नहीं होती। एक समय पर, मुझे भी लगने लगा था कि मेरा कोई गेमप्ले नहीं है। लेकिन बाहर आने और पूरा गेम देखने के बाद, मुझे लगा कि मैं असल में सबसे मजबूत खिलाड़ियों में से एक थी। शायद लोगों ने मुझे कमजोर इसलिए कहा क्योंकि मैं एक मजबूत कॉम्पिटिशन थी।” आकांक्षा चमोला ने कहा कि उन्होंने अपने परफॉर्मेंस को लगातार झगड़ों के बजाय ईमानदारी के आधार पर आंका। उन्होंने कहा, “मैंने अपने राज खोले, अपनी सच्चाई को अपनाया, टास्क में हिस्सा लिया, लोगों का मनोरंजन किया और बेवजह के झगड़ों से बची रही। मुझे समझ नहीं आता कि किसी को ऐसा क्यों लगा कि मैं इसके लायक नहीं थी।”
आकांक्षा चमोला ने कहा कि शो छोड़ने के बाद उन्हें जो सराहना मिली है, वो कॉम्पिटिशन से कहीं ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने कहाा, “मैंने हमेशा कहा कि भले ही मैं गेम हार गई, लेकिन मैंने लोगों का दिल जीत लिया। इससे मुझे खुशी मिलती है। लोग अब कहते हैं कि मैंने असली ‘लॉक अप’ गेम खेला। तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि ट्रॉफी कोई और जीतता है?” एक्टर ने उन कमेंट्स पर भी बात की जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अक्सर साथी कंटेस्टेंट्स का साथ दिया, लेकिन बदले में उन्हें वैसा साथ नहीं मिला। आकांक्षा चमोला ने कहा, “ये जिंदगी का हिस्सा है। हर किसी ने वही किया जो उन्हें सही लगा। मैं उनमें सबसे कम अनुभवी थी। अगर कोई मेरे साथ खड़ा नहीं हुआ, तो इसका मतलब ये नहीं है कि मैंने सब कुछ खो दिया। मैंने दर्शकों का प्यार और तारीफ कमाई और मेरे लिए यही जीत है।”
उनके शो में रहने के दौरान सबसे बड़ी चर्चा की बात साथी कंटेस्टेंट श्रेया कालरा द्वारा उनके राज खोलना थी। आकांक्षा चमोला ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कालरा को माफ कर दिया है, हालांकि उनका मानना है कि दर्शक ही तय करेंगे कि इस घटना को कैसे देखा जाए। उन्होंने कहा, “उसने मुझसे वो पल छीन लिया। लेकिन जब मैं किसी को माफ कर देती हूं, तो मेरा कर्म पूरा हो जाता है। दर्शक उसे माफ करते हैं या नहीं, ये उनकी मर्जी है।”
उन्होंने साफ किया कि उन्हें शो में अपनी निजी बातें बताने का कोई पछतावा नहीं है। कांस्टेंट के एक टास्क में फेल होने के बाद आकांक्षा को शो से बाहर कर दिया गया। इसके बाद होस्ट फराह खान और रितेश देशमुख ने ‘बांटो और राज करो’ वाला ट्विस्ट पेश किया। कांस्टेंट को “काबिल” और “नाकाबिल” ग्रुप में बांटा गया। योगेश रावत, वरुण यादव और श्रेया कालरा को राम कपूर, शिल्पा शिंदे और आकांक्षा चमोला में से किसी एक कांस्टेंट को बाहर करने की पावर दी गई। तीनों ने मिलकर आकांक्षा चमोला को बाहर करने के लिए वोट किया, जिससे उनका सफर इमोशनल तरीके से खत्म हुआ। ‘लॉक अप: सच या सजा’ का ग्रैंड फिनाले बुधवार रात आठ बजे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगा। एकता कपूर और शोभा कपूर की तरफ से प्रोड्यूस किए गए इस रियलिटी शो को फराह खान और रितेश देशमुख होस्ट कर रहे हैं।