Ayodhya: राम मंदिर की कमान अब संतों के हाथ, अयोध्या में नई संत समिति का गठन

Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की धार्मिक व्यवस्था और पूजा-अर्चना की निगरानी के लिए 9 सदस्यीय नई धार्मिक समिति यानी संत समिति का गठन किया है।ट्रस्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव चर्चा में रहे हैं। अब मंदिर की धार्मिक गतिविधियों की कमान संतों के मार्गदर्शन में संचालित होगी। इस संत समिति में शामिल देश के प्रमुख धर्माचार्य हैं…सबसे पहले नाम है जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का…जो ज्योतिर्मठ परंपरा से जुड़े हैं और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्यों में शामिल हैं।

वैदिक परंपराओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी इनके अनुभव से जुड़ेगी। इसके अलावा समिति में शामिल हैं जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज, जो बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित पेजावर मठ के पीठाधीश्वर हैं। महंत दिनेंद्र दास को भी समिति में जगह दी गई है। वह निर्मोही अखाड़े के प्रमुख हैं और राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य भी हैं।महंत कमलनयन दास भी इस नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे। वह मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी हैं और महंत नृत्य गोपाल दास जी के उत्तराधिकारी के तौर पर जाने जाते हैं।

समिति में स्वामी रामानंद दास शामिल हैं, जो अयोध्या के रामकथा कुंज से जुड़े रामानंदी परंपरा के प्रतिष्ठित विद्वान हैं।महंत राजकुमार दास को भी जिम्मेदारी दी गई है। वह अयोध्या के प्रमुख श्री रामबल्लभ कुंज के उत्तराधिकारी हैं।इसके साथ ही स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण समिति के सदस्य होंगे, जो सरयू तट स्थित श्री हनुमत निवास मंदिर के महंत और विद्वान हैं।और युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरी महाराज भी इस समिति में शामिल हैं। वह राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध वेदांत संत हैं और ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। अब बात समिति की जिम्मेदारियों की…इस संत समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी कि रामलला की दैनिक पूजा-अर्चना, राजभोग और सभी धार्मिक अनुष्ठान रामानंदी वैष्णव परंपरा और वैदिक विधि-विधान के अनुसार संचालित हों।

रामनवमी, सीता नवमी जैसे बड़े धार्मिक पर्वों की तारीख, स्वरूप और आयोजन की रूपरेखा भी यही समिति तय करेगी।इतना ही नहीं… मंदिर के अर्चकों यानी पुजारियों की नियुक्ति, उनका प्रशिक्षण, आचरण और ड्रेस कोड भी समिति की निगरानी में रहेगा।यानी अब अयोध्या के राम मंदिर में पूजा पद्धति से लेकर धार्मिक अनुशासन तक… हर महत्वपूर्ण फैसला संतों के मार्गदर्शन में अयोध्या से रामलला की सेवा व्यवस्था अब संतों के संकल्प और मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ेगी।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर की पूरी धार्मिक व्यवस्था और पूजा-अर्चना की देखरेख के लिए 9 सदस्यीय नई धार्मिक समिति (संत समिति) का पुनर्गठन किया है। हाल ही में हुए चढ़ावा विवाद और प्रशासनिक बदलावों के बाद, ट्रस्ट ने मंदिर की कमान पूरी तरह से संतों के हाथों में सौंपने का यह बड़ा फैसला लिया है।

धार्मिक समिति में शामिल प्रमुख संत:-

1. जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती: ज्योतिर्मठ परंपरा से जुड़े और ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य, जो वैदिक परंपराओं को सुदृढ़ करेंगे.

2.जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज: बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित पेजावर मठ के पीठाधीश्वर

3. महंत दिनेंद्र दास: निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख और राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य।

4. महंत कमलनयन दास: मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी (महंत नृत्य गोपाल दास जी के उत्तराधिकारी)।

5. स्वामी रामानंद दास: अयोध्या के रामकथा कुंज से जुड़े रामानंदी परंपरा के प्रतिष्ठित विद्वान

6. महंत राजकुमार दास: अयोध्या के प्रमुख श्री रामबल्लभ कुंज के उत्तराधिकारी।

7. स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण: सरयू तट पर स्थित श्री हनुमत निवास मंदिर के महंत और विद्वान।

8. युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरी महाराज: राष्ट्रीय स्तर के जाने-माने वेदांत संत और ट्रस्ट के सदस्य।

 

समिति के मुख्य अधिकार और जिम्मेदारियां:-

रामानंदी परंपरा से पूजा: रामलला की दैनिक पूजा-अर्चना, राजभोग और सभी अनुष्ठान विशुद्ध वैदिक रामानंदी वैष्णव परंपरा के अनुसार ही संचालित होंगे।

तिथियों का निर्धारण: रामनवमी, सीता नवमी और अन्य प्रमुख उत्सवों की सही तारीख और स्वरूप यही समिति तय करेगी।

पुजारियों पर नियंत्रण: मंदिर के अर्चकों (पुजारियों) की नियुक्ति, उनका प्रशिक्षण, आचरण और ड्रेस कोड पूरी तरह समिति की निगरानी में रहेगा।

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