Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रा के सातवें जत्थे को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर के लिए रवाना किया गया। बेस कैंप परिसर बम बम भोले, हर हर महादेव और जय बर्फानी बाबा के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर गहरा उत्साह देखने को मिला।
मंगलवार को अब तक का सबसे बड़ा जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हुआ था। इस जत्थे में 8,815 श्रद्धालु शामिल थे, जिनमें 31 विदेशी नागरिक भी थे। इस दल में 5,831 पुरुष, 2,193 महिलाएं, 31 बच्चे, 598 साधु, 131 साध्वियां और 31 विदेशी श्रद्धालु शामिल थे। इनमें से 3,989 श्रद्धालु 181 वाहनों में बालटाल मार्ग के लिए रवाना हुए, जबकि 4,826 श्रद्धालु 182 वाहनों के जरिए पारंपरिक पहलगाम मार्ग की ओर भेजे गए। इस तरह कुल 363 वाहनों का काफिला कश्मीर के लिए निकला।
यात्रा के पहले चार दिनों में 93,000 से अधिक श्रद्धालु समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह संख्या जल्द ही एक लाख का आंकड़ा पार कर जाएगी। वहीं, 2 जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से मंगलवार तक कुल 34,829 श्रद्धालु जम्मू बेस कैंप से कश्मीर के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए अपंजीकृत श्रद्धालुओं से कुछ दिन यात्रा स्थगित करने की अपील की है, क्योंकि 9 जुलाई तक के सभी पंजीकरण स्लॉट भर चुके हैं। बिना पंजीकरण वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित जांच चौकियों पर रोका जाएगा।
अमरनाथ यात्रा भारत की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। जम्मू-कश्मीर में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य इसी गुफा में बताया था। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग पार कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस वर्ष 57 दिनों तक चलने वाली यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।