Ayodhya:अयोध्या में कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और प्रशासक गोपाल राव समेत चार लोगों के खिलाफ पुलिस को शिकायत सौंप दी। शिकायत दर्ज कराने के लिए अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया और राम जन्मभूमि थाने तक मार्च निकालने का प्रयास किया, हालांकि पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कलिका प्रसाद मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर ली है और एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “हमारी शिकायत में चार लोगों के नाम शामिल हैं। फिलहाल केवल शिकायत दर्ज हुई है, एफआईआर अभी दर्ज नहीं की गई है।”
इससे पहले अधिवक्ताओं के मार्च का नेतृत्व करते हुए मिश्रा ने कहा कि कानूनी बिरादरी इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां से अब पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।”
बार एसोसिएशन के सदस्य पहले संगठन के सभागार में एकत्र हुए और बैठक करने के बाद राम जन्मभूमि थाने की ओर रवाना हुए। उनका उद्देश्य राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन को लेकर नई शिकायत दर्ज कराना था।
कलिका प्रसाद मिश्रा के अनुसार, शिकायत में मामले से जुड़े नए तथ्यों के आधार पर नई एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बार एसोसिएशन इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग करेगा और यदि शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो कानूनी विकल्पों का सहारा लिया जाएगा।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अयोध्या राम मंदिर को प्राप्त दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और निष्पक्ष व व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए उसके कार्यकाल को बढ़ा दिया है।
एसआईटी को जांच का दायरा विस्तारित करने के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जाएगी।
गौरतलब है कि इस मामले में 25 जून को पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। वहीं, पुलिस जांच के तहत कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।